नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- भौतिक जीवन की आपाधापी में गीत-संगीत हो या कथा-उपदेश, भगवान की महिमा हो या गीता ज्ञान इन सबके श्रवण से हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है। इसी प्रसन्नता को देश-दुनिया के लोग भी अनुभव कर सकें और अपने कानों की सुरक्षा और हानि के प्रति सचेत रहें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। इसी कड़ी में इस्कॉन द्वारका ने भी सहयोग के लिए आगे आया है।
श्री श्री रुक्मिणी द्वारकाधीश मंदिर सेक्टर 13 में रैंपो क्लीनिक की ओर से शुक्रवार, 3 मार्च को प्रातः 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक ‘फ्री हीयरिंग कैंप’ का आयोजन सेमिनार हॉल में किया जाएगा। मंदिर के वरिष्ठ प्रबंधक का कहना है कि सामाजिक हित में हम हर साल ऐसे आयोजन करते हैं। खासतौर से इस कैंप का उद्देश्य लोगों में बहरेपन और श्रवण हानि को रोकना है। लोग अकसर कानों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही करते देखे जाते हैं। उन्हें इस बात का कोई अनुमान नहीं होता कि पूरे दिन में कानों को भी एक निश्चित अनुपात में कुछ घंटे पूर्ण आराम की आवश्यकता होती है पर मोबाइल और डिजिटल युग ने सबकुछ भुला दिया है जबकि कान हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इससे हम भगवान की मधुर वाणी आदि कुछ भी सुन सकते हैं। अगर सुनने में परेशानी है तो सतर्क हो जाएँ। अतः कान और सुनने की देखभाल के प्रति लोगों में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता पैदा हो इसलिए ऐसे कैंपों की नियमित आवश्यकता होती है। अकसर शोर पर व्यक्ति का नियंत्रण नहीं होता और उसे अनचाहे भी तेज आवाज के जोखिम को सहना पड़ता है। पर इससे बचने के लिए आप किन उपायों को अपनाएँ और अन्य किन सावधानियों का पालन करें ताकि ताउम्र आप अपनी श्रवण शक्ति को बरकरार रख पाएँ। इनके बारे में भी कैंप में विस्तार से बताया जाएगा। स्वस्थ जीवन यानी स्वस्थ व्यक्ति से ही स्वस्थ समाज और देश का विकास होता है। अतः जीवन के लिए सुनना और अपनी श्रवण शक्ति को बनाए रखना बेहद जरूरी है।

रैंपों क्लीनिक के श्रवण वैज्ञानिक डॉ. राम प्रवेश कुमार का कहना है कि जब से स्मार्ट फोन और स्मार्ट टेक्नोलॉजी ने घरों में प्रवेश किया है, तब से कान या सुनाई देने से संबंधित विकारों में बढ़ोतरी हुई है। विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर डा. राम स्वस्थ कानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देते हैं कि शोर भरी जगहों पर ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। अपनी श्रवण शक्ति की नियमित रूप से जाँच कराएँ और डॉक्टर की सलाह पर हियरिंग ऐड का नियमित उपयोग करें। इसके अतिरिक्त कान के अंदर रुई, बड्स, तेल, तीली अथवा पिन बिलकुल न डालें। कभी-कभार भी गंदे पानी पूल आदि में नहाएं या तैरे नहीं। कभी भी दूसरे के ईयर फोन या ईयरप्लग का इस्तेमाल न करें और तेज आवाजों और तेज संगीत सुनने से बचें।

सुनने में तकलीफ कई कारणों से हो सकती है और सुनाई न देने की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है। सही मायनों में कानों की सेहत के लिए हमें उन संसाधनों के उपयोग से बचना होगा जो कानों में विकार उत्पन करते हैं। यही नहीं, लोग अकसर हीयरिंग लॉस को अनदेखा करते हैं। आवाज सुनने की क्षमता कम हो जाए तो इस स्थिति को हियरिंग लॉस कहते हैं। जब क्षमता चली जाए तो जिंदगी अधूरी लगने लगती है। सुनने की क्षमता को बनाए रखने के लिए तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। कानों के सामान्य बचाव के लिए हमें बचपन से ही सतर्क किया जाता है। कानों में पानी न जाने दें, किसी भी प्रकार का तरल पदार्थ कानों में न डालें। कभी भी कानों में कोई नुकीली चीज न डालें पर इसे चिकित्सीय दृष्टि से भी जानना जरूरी है। अतः अपने व्यस्त जीवन में थोड़ा समय निकालें और कानों की जाँच अवश्य कराएँ।
इस्कॉन द्वारका में कैंप की व्यवस्था के अंतर्गत ऑडियोलॉजी एंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी (ऑडियो-एसपीएल) विभाग एवं फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज (एफएएचएस) के साथ-साथ एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुड़गांव एवं विजन इंस्टीट्यूट फरीदाबाद का भी समन्वित सहयोग रहेगा।


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