मृतक सिपाही बेटे को न्याय दिलाने के दर-दर की ठोकरे खा रही है शहीद की विधवा

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April 11, 2026

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मृतक सिपाही बेटे को न्याय दिलाने के दर-दर की ठोकरे खा रही है शहीद की विधवा

-तीन महीने पहले नजफगढ़ स्थित कार्यालय में मिली थी बेटे की जली हुई लाश, पुलिस अभी तक नही खोल पाई मौत का राज

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/- करीब 10 महीने पहले सीआरपीएफ से वीआरएस लेकर पावर ट्रेडिंग की कंपनी चला रहे मृतक रेडियो ऑपरेटर अरूण की मौत का राज पुलिस तीन महीने बाद नही खोल पाई हैं। मृतक की मां व शहीद की विधवा सूरज देवी अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए दर-दर की ठोकरे खा रही है लेकिन आज तक न पुलिस उसकी सुन रही है और न ही सरकार शहीद की विधवा को न्याय दिला सकी है।
                  बता दें कि 29 अक्टुबर 2022 में मृतक अरूण का जला हुआ शव संदिग्ध हालात में उनके कार्यालय से मिला था। वह सीआरपीएफ में रेडियों ऑपरेटर की पोस्ट पर कार्यरत थे लेकिन 28 फरवरी को उन्होने अपनी 20 साल की सर्विस समाप्त कर वीआरएस ले ली थी और पावर ट्रेडिंग कंपनी चला रहे थे जिसमें 10 कर्मचारी काम करते थे। वह अर्धसैनिकों के लिए टोपी व अन्य सामान की आपूर्ति करता था। उनके पिताजी भी फौज में थे लेकिन वो शहीद हो गये थे। अरूण मूलरूप से हरियाणा के नारनौल के नूनी कलां गांव के रहने वाले हैं। लेकिन वीआरएस के बाद अपनी पत्नी शीतल व दो बच्चों के साथ नजफगढ़ में रहते थे। 29 अक्टुबर को उनके आफिस में कुछ दोस्तों ने पार्टी की थी इसके बाद वो चले गये और अरूण वहीं सो गये लेकिन रात को अचानक आग लगी देखकर दो बाईक सवारों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। दो दमकल गाड़ियों ने आकर आग बुझाई और पुलिस ने मौका मुआयना किया। पुलिस को कार्यालय में कोई ज्वलनशील पदार्थ नही मिला फिर भी आग इतनी भयानक कैसे थी, पुलिस को यह बात समझ नही आ रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि अरूण के साथ ही उनका लैपटाप व मोबाइल फोन भी रखा था जो कहीं से भी नही जले जिससे आफिस में आग लगने की घटना को पुलिस भी शक की नजर से देख रही है। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी भी जांच की ही बात कह रही है। लेकिन अरूण की बुजुर्ग मां अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए बाबा हरिदास नगर थाने के साथ-साथ एसीपी व डीसीपी कार्यालय के लगातार चक्कर रही है लेकिन अभी तक उन्हे कोई संतुष्टिपूर्ण जवाब नही मिला है। उनका कहना है कि वैसे तो सरकार शहीदों के लिए बड़ी-बड़ी बाते करती है लेकिन यहां एक शहीद की विधवा व वृद्धा अपने बेटे की मौत पर न्याय की गुहार लगा रही है लेकिन कोई सुनने वाला नही है। वहीं मृतक पत्नी व 12 साल का बेटा तथा 17 साल की बेटी भी अपनी वृद्धा दादी के साथ दर-दर की ठोकर खा रहे है। उन्होने सरकार से अपील की है कि उन्हे न्याय दिलाने में सरकार मदद करें।

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