महाराष्ट्र के यवतमाल में मिले 150 करोड़ साल पहले के समुद्री जीवाश्म, वैज्ञानिक का दावा यहां था पहले समुद्र

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महाराष्ट्र के यवतमाल में मिले 150 करोड़ साल पहले के समुद्री जीवाश्म, वैज्ञानिक का दावा यहां था पहले समुद्र

-अब तक 340 करोड़ साल तक के मिल चुके है जीवाश्म, पृथ्वी पर इन्ही सुक्ष्मजीवियों से हुआ प्राणियो का विकास

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- महाराष्ट्र के वणी में 150 करोड़ साल पुराना जीवाश्म मिला है. इसे खोजने वाले वैज्ञानिक का दावा है कि यह पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय सागर के उथले गर्म पानी में विकसित हुआ था। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के वणी में पर्यावरण एवं भूगोल विशेषज्ञ प्रो. सुरेश चोपणे ने इस प्राचीन जीवाश्म को खोजा है.उनका दावा है कि साइनोबैक्टीरिया स्ट्रोमैटोलाइट के जीवाश्म हैं।
                   प्रो. सुरेश चोपणे ने कहा कि ये जीवाश्म वणी के बोडी व मोहुली परिसर में चूने के पत्थर (चुनखड़ी) में मिले हैं. जीवाश्म देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि करोड़ों साल पहले वणी समुद्र के नीचे था. उनका दावा है कि यवतमाल जिले के 5 स्थानों पर पाषाण युग के और चार स्थानों पर करोड़ों साल पुराने शंख और सीप के जीवाश्म भी पाए जा चुके हैं। मूल रूप से वणी निवासी चोपणे पिछले दो वर्ष से इस जीवाश्म की खोज कर रहे थे। प्रो. चोपणे ने बताया कि भारत में राजस्थान के भोजुदा, मध्यप्रदेश के चित्रकूट, महाराष्ट्र के चंद्रपुर व वणी में यह जीवाश्म मिल चुके हैं।.इस खोज से वणी शहर के प्राचीनतम भौगोलिक इतिहास का पता चल सकता है। वणी में मिले जीवाश्म निओ-प्रोटेरोजोइक काल के साइनोबैक्टीरिया स्ट्रोमैटोलाइट हैं। ये पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय सागर के उथले गर्म पानी में विकसित हुए थे।
                      प्रोफेसर सुरेश चोपणे कहते हैं कि खनिज खाने वाले इन्हीं सूक्ष्मजीवों से मछली, सरिसृप, डायनासोर और मनुष्य जैसे बहुकोशीय प्राणी विकसित हुए. टिशियस काल मे.भूगर्भीय बदलावों के चलते सागर सिमटा। उथले पानी की कीचड़ का रूपांतरण चूने के पत्थरों के रूप में हुआ, तब ये सूक्ष्मजीव इसमें दब गए।
                      स्ट्रोमैटोलाइट एक तरह का सेडीमेंट्री फॉर्मेशन है, जिसे पत्थरों के ऊपर फोटोसिंथेटिक साइनोबैक्टीरिया बनाती है। कई बार इनकी एकदूसरे के ऊपर इतनी परत चढ़ ज.जाती है कि इनका आकार 1 मीटर से ज्यादा हो जाता है। ये स्ट्रोमैटलाइट बेहद दुर्लभ होते हैं, हालांकि दुनियाभर में कई बार ये मिले हैं, जिनसे पृथ्वी की उत्पति का पता चलता है। उसके प्राचीन इतिहास की जानकारी मिलती है।
                      ज्यादातर ये नमकीन पाने वाले स्थानों पर मिलते हैं। जैसे समुद्र के तट. लेकिन महाराष्ट्र के यवतमाल के वणी में समुद्र नहीं है। इसका मतलब ये है कि 150 करोड साल पहले यहां पर समुद्र हुआ करता होगा। तभी वहां से साइनोबैक्टीरिया स्ट्रोमैटेलाइट के जीवाश्म मिले हैं।
                           अब तक सबसे पुराना स्ट्रोमैटोलाइट जीवाश्म ऑस्ट्रेलिया के पिलबारा क्रेटॉन में मिला है। यह करीब 3.4 बिलियन साल यानी  340 करोड़ साल पुराना है। स्ट्रोमैटालस्ट्रोमैटालाइट हमेशा नमकीन पानी यानी समुद्री जल में ही नहीं बनता। ये फ्रेशवाटर में होते हैं। ब्रिटिश कोलंबिया के पैविलियन लेक में भी ये मिलते है। जो साफ पानी का स्रोत है।

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