कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना ने सोमवार, 11 अगस्त को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह इस्तीफा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सौंपा, जिसे राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने स्वीकार कर लिया। इस्तीफे की वजह मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर उनकी अपनी ही पार्टी कांग्रेस के खिलाफ उठाई गई आवाज रही।
अनियमितताओं की बात स्वीकारी
हाल ही में राजन्ना ने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा विधानसभा खंड में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए कहा था, “मतदाता सूची कब तैयार हुई? यह हमारी अपनी सरकार के समय में तैयार हुई थी। उस समय क्या सभी लोग चुपचाप आंखें बंद करके बैठे थे? ये अनियमितताएं वास्तव में हुईं, यह सच है। हमें इस पर शर्मिंदगी महसूस करनी चाहिए।” उनका यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों के विपरीत था, जिसमें राहुल ने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था।
राजन्ना ने यह भी कहा कि जब मसौदा मतदाता सूची तैयार की गई थी, तब कांग्रेस नेताओं ने आपत्तियां दर्ज नहीं कीं, जो उनकी जिम्मेदारी थी।
के.एन. राजन्ना से जुड़े विवाद
मधुगिरी से विधायक और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले के.एन. राजन्ना पहले भी कई विवादों में रहे हैं। उन्होंने उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से हटाने और दलित मुख्यमंत्री बनाने की वकालत करके सुर्खियां बटोरी थीं। इसके अलावा मार्च 2025 में उन्होंने 48 विधायकों को ‘हनी ट्रैप’ में फंसाने का आरोप लगाया था, हालांकि जांच में कोई सबूत नहीं मिला।


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