भारतरत्न अवार्डी व स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी

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भारतरत्न अवार्डी व स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जीवनी

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- लता मंगेशकर आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. उन्हें स्वर कोकिला कहा गया है। उनकी आवाज की पूरी दुनिया दीवानी है। पिछले 6 दशकों से लता मंगेशकर भारतीय सिनेमा को अपनी आवाज दे रही हैं। वो बेहद शांत स्वभाव की और प्रतिभा की धनी हैं।
                28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल मंगेशकर के घर में लता मंगेशकर का जन्म हुआ था. लता जी के पिता रंगमंच के एक कलाकार और गायक भी थे. यही वजह है कि लता जी को संगीत विरासत में मिली. बताया जाता है कि लता मंगेशकर का जन्म के समय नाम ’हेमा’ रखा गया था लेकिन उनके पिता ने 5 साल के बाद उनका नाम लता रख दिया।
               लता मंगेशकर अपने सभी भाई-बहनों में बड़ी हैं. मीना खाडीकर, उषा मंगेशकर, आशा भोंसले, ह््रदयनाथ मंगेशकर. ये सभी लता मंगेशकर से छोटे हैं. लता मंगेशकर के जन्म के कुछ ही दिनों के बाद इनका पूरा परिवार महाराष्ट्र चला गया था. लता मंगेशकर जब 13 साल की ही थीं, उसी समय इनके पिता का निधन हो गया. नवयुग चित्रपट फिल्म कंपनी के मालिक और लता जी के पिता के दोस्त मास्टर विनायक ने इनके परिवार को संभाला और लता मंगेशकर को ओक सिंगर बनाने में मदद की।
               लता मंगेशकर ने अपने संगीत की शुरुआत मराठी फिल्मों से की. लता जी ने खुद ही अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर करते हुए बताया है कि वो 16 दिसंबर 1941 को ईश्वर का, पूज्य माई और बाबा का आशीर्वाद लेकर उन्होंने रेडियो के लिए पहली बार स्टूडियो में 2 गीत गाए थे. लता जी ने साल 1942 में मराठी फिल्म ’किटि हासल’ के लिए एक गाना गाया था लेकिन आखिरी समय में फिल्म से गाने को निकाल दिया गया. इसके बाद विनायक ने नवयुग चित्रपट की मराठी फिल्म ’पहली मंगला गौर’ जो कि 1942 में आई थी, के लिए गाना गाया।
               लता जी ने उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, पंडित तुलसीदास शर्मा और अमानत देवसल्ले से संगीत की शिक्षा ली. साल 1948 में मास्टर विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर, लता जी के संगीत मेंटर बने. हेदर ने लता जी की मुलाकात शशधर मुकर्जी से कराई, जो उस वक्त ’शहीद’ फिल्म बना रहे थे. क्यूंकि लता जी की आवाज कुछ ज्यादा ही पतली थी इसी वजह से उन्होंने लता जी को अपनी फिल्म के लिए गाने का मौका नहीं दिया.
लता जी ने उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, पंडित तुलसीदास शर्मा और अमानत देवसल्ले से संगीत की शिक्षा ली. साल 1948 में मास्टर विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर, लता जी के संगीत मेंटर बने. हेदर ने लता जी की मुलाकात शशधर मुकर्जी से कराई, जो उस वक्त ’शहीद’ फिल्म बना रहे थे. क्यूंकि लता जी की आवाज कुछ ज्यादा ही पतली थी इसी वजह से उन्होंने लता जी को अपनी फिल्म के लिए गाने का मौका नहीं दिया।
               लता जी ने हिंदी भाषा में पहला गाना ’माता एक सपूत की, दुनिया बदल दे तू’ और मराठी फिल्म ’गाजाभाऊ’ के लिए गीत गाया. इसके बाद लता मंगेशकर मुंबई चली गईं. यहां उन्होंने हिंदुस्तान क्लासिकल म्यूजक के उस्ताद अमानत अली खान से क्लासिकल संगीत सीखना शुरू कर दिया. उन्होंने कई छोटे रोल्स किए और बजन भी गाए. इसी दौरान उनकी मुलाकात वसंत देसाई से हुई।
               साल 1949 में आई फिल्म ’महल’ में लता जी का मधुबाला के लिए गाया हुआ एक गाना ’आएगा आने वाला…’ काफी हिट हुआ. साल 1950 में लता जी ने कई संगीतकारों के साथ काम किया. साल 1955 में लता जी ने तमिल फिल्मों के लिए भी गाने गाए. लता जी को पहली बार साल 1958 में फिल्म ’मधुमति’ के लिए सलिल चौधरी के लिए गीत ’आजा रे परदेशी’ के लिए बेस्ट फीमेल सिंगर का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला।
                लता जी ने 1960 के बाद कई गायकों के सथ गाने गाए जिनमें मुकेश, मोहम्मद रफी, मन्ना डे, महेन्द्र कपूर और किशोर कुमार शामिल हैं. 1961 में लता जी ने फेमस भजन ’अल्लाह तेरो नाम’ गाया. वहीं 1963 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी में देश का सबसे जीवंत गीत ’ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया, जो आज भी बेहद लोकप्रिय है. इस गाने को सुनने के बाद नेहरू जी की आंखों से आंसू निकल आए थे।
                1960 से लेकर 1980 के दौरान लता जी ने कई संगीतकारों के साथ काम किया जिनमें मदन-मोहन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, सलिल चौधरी और हेमंत कुमार के साथ कई बंगाली और मराठी गाने भी गाए. 1980 में लता जी ने सिलसिला, फैसला, विजय, चांदनी, रामलखन और मैंने प्यार किया जैसी हिट फिल्मों के लिए अपनी आवाज दी. जबकि 1990 में लता जी ने आनंद-मिलिंद, नदीम-श्रवण, जतिन-ललित, दिलीप-समीर सेन, उत्तम सिंह, अनु मलिक, आदेश श्रीवास्तव और ए आर रहमान के साथ भी काम किया।
               लता मंगेशकर को भारतीय संगीत में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए 1969 में पद्मविभूषण, 1989 में दादा साहब फाल्के अवॉर्ड, 1999 में महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड, 2001 में भारतरत्न, 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 12 बंगाल फिल्म पत्रक अवॉर्ड और 1993 में फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड समेत कई सारे पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. बता दें कि लता जी ने 1948 से लेकर 1989 तक 30 हजार से भी ज्यादा गाने गाए हैं, जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है।

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