पी.ई.डी. स्लिप्ड डिस्क का बेहतर उपचार – डा.सतनाम सिंह छाबड़ा

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February 16, 2026

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पी.ई.डी. स्लिप्ड डिस्क का बेहतर उपचार – डा.सतनाम सिंह छाबड़ा

-डा.सतनाम सिंह छाबड़ा सर गंगाराम अस्पताल में न्यूरो एंड स्पाइन विभाग के डायरेक्टर है

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- आजकल लोगों के लिए कमर दर्द भी एक बहुत बड़ी कष्टदायक समस्या बनी हुई है और अब ये दुनिया में एक महामारी का रूप लेती जा रही है। आज हर उम्र के लोग इससे परेशान हैं और दुनिया भर में इसके सरल व सहज इलाज की खोज जारी है। वास्तव में मनुष्य के शरीर में कमर को सबसे मजबूत भाग माना जाता है व हमारी कमर की बनावट में हड्डियां, कार्टिलेज (डिस्क), जोड़, मांसपेशियां, लिगामेंट व नसें आदि सभी शामिल हैं। इनमें से किसी के भी विकारग्रस्त होने पर कमर दर्द उत्पन्न हो सकता है। मैकेनिकल कारणों के साथ टी.बी. से लेकर कैंसर तक कोई भी कारण दर्द पैदा कर सकता है। कमरदर्द का शिकार पुरुषों से अधिक महिलाएं होती हैं जिसका मुख्य कारण होता है कमर की मांसपेशियों की कमजोरी। इसका दूसरा कारण है कमर की हड्डियों के जोडों में विकार है। हालांकि अभी तक इसके कुछ परम्परागत ईलाज ही किये जाते थे लेकिन अब पी.ई.डी के जरीये स्लिप्ड डिस्क का बेहतर उपचार किया जा रहा है।

इस संबंध में सर गंगाराम अस्पताल में न्यूरो एंड स्पाइन विभाग के डायरेक्टर डा. सतनाम सिंह छाबड़ा का कहना है कि कमर दर्द से जुड़ी बीमारियों के प्रायः लक्षण हैं- पैरों का सुन्न होना, भारी या कमजोरी का एहसास होना, पेशाब में परेशानी, चलने पर पैरों के दर्द का बढऩा, झुकने या खांसने पर पूरे पैर में करंट जैसा लगना आदि। कई बार रोगियों की चाल शराबियों जैसे लडख़ड़ाती चाल हो जाती है। कमर दर्द के कई मुख्य कारण है। ये सभी कारण कई रीढ़ संबंधी बीमारियों को जन्म देते है जैसे-स्पोंडिलाइटिस, सर्वाइकल, टी.बी, कमर में ट््यूमर, स्प्लिड डिस्क आदि। स्प्लिड डिस्क इसमें से एक बहुत ही गंभीर समस्या बन गई है।

उन्होने बताया कि यह स्प्लिड डिस्क का रोग कमर के अलावा गर्दन में भी हो सकता है। अभी तक पुराने स्प्लिड डिस्क के ऑपरेशन से लोग काफी भयभीत थे, क्यों कि इसमें नसों के कट जाने व अपाहिज हो जाने का डर रहता था। इस बीमारी से निजात पाने के लिए कई शोध किए जा रहे हैं तथा नई-नई आधुनिकताओं ने व कई प्रयोगों ने बहुत सी नवीन तकनीकों को जन्म दिया है इसके अलावा कई दवाइयों के माध्यम से भी इनका इलाज किया जा रहा है। किंतु इन सब के द्वारा बीमारी को जड़ से उखाड़ पाना या पूरी तरह से निवारण कर पाना अभी तक संभव नहीं था। लेकिन अब पी.ई.डी यानी (परक्यूटेनियस इंडोस्कोपिक डिक्सक्टेमी) यह सर्जरी केवल एक छोटे से छिद्र के द्वारा संभव हो जाती है और इसमें मरीज को बेहोश करने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। इस ऑपरेशन में टीवी पर देखते हुए एक चार मिलीमीटर का इंडोस्कोप सुन्न करके डिस्क में डाला जाता है और सी आर्म व टेलीविजन मॉनिटर पर 20 गुणा बड़ी तस्वीर को देखते हुए सूक्ष्म व सफल तरीके से निकाला भी जा सकता है। इसमें अलग से रक्त या ज्यादा दवाइयों की आवश्यकता नहीं पड़ती। मरीज ज्यादा दिनों तक अस्पताल में भी नहीं रहना पड़ता और सबसे बडी फायदा तो यह है कि मरीज जल्द से जल्द अपने काम पर वापस लौट सकता है। अब लोगों को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है क्यों कि पी ई डी बेहद आसान व सुरक्षित तरीके से कमर दर्द के मरीजों को उनके मर्ज से निजात दिला सकता है। उनके अनुसार हृदय रोग व गुर्दे और लीवर फेलियर के मरीज या शुगर व सांस जैसी बीमारियों से ग्रस्त रोगियों में भी यह उपचार मुमकिन है यानी कि बेहोशी की सारी जटिलताओं से मरीज बच जाता है।

डा. छाबड़ा ने बताया कि इस प्रक्रिया में विकारग्रस्त या डीजनरेटेड डिस्क को निकाल दिया जाता है व उसके स्थान पर कृत्रिम डिस्क को प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। कृत्रिम डिस्क एक सैंडविच की तरह होती है,जिसके बीच में एक लचीला पदार्थ होता है जैसा कि रबड़,सिलीकॉन या नायलॉन और दोनों तरफ मेटल जैसे टाइटैनियम स्टील या सिरेमिक लगे होते हैं। ये नॉर्मल डिस्क की तरह ही मजबूत होने के साथ-साथ लचीली भी होती है। इसके लगते ही मरीज की कमर पहले की तरह पुनः लोचशील हो जाती है। डा. छाबड़ा ने कमर दर्द से बचने के कुछ खास तरीके भी बतायेः– उठने-बैठने के ढंग में परिवर्तन करें। बैठते वक्त सीधे तन कर बैठें। कमर झुकाकर या कूबड़ निकालकर न बैठें और न ही चलें।- यदि बैठे-बैठे ही अलमारी की रैक से कुछ उठाना है तो अंगों की ओर झुककर ही वस्तु उठाएं।- अपनी क्षमता से अधिक वजन न उठाएं।- नरम या गुदगुदे से बिस्तर पर न सोएं बल्कि सपाट पलंग या तख्त पर सोएं. ताकि पीठ की मांसपेशियों को पूर्ण विश्राम मिले।- वजन को हरगिज न बढऩे दें,भले ही इसके लिए आपको डायटिंग या व्यायाम ही क्यों न करना पड़े।- तनाव की स्थितियों से बचें। चिंता दूर करने के लिए खुली हवा में टहलें। कोई भी मनोरंजक क्रिया कलाप करें,जिससे ध्यान दूसरी ओर बंटे.- नियमित व्यायाम की आदत डालें, ताकि शरीर चुस्त-दुरूस्त व फुर्तीला रहे और शरीर के सभी अंग क्रियाशील रहें। इसमें पैदल चलना।

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