मानसी शर्मा /- कल शारदीय नवरात्रि दिन है, जो मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। इस दिन साधक साधना, संयम और तपस्या के प्रतीक रूप मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करते हैं। यह दिन भक्तों के लिए आत्मानुशासन और श्रद्धा का परिचायक होता है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य है। इनके हाथों में जप माला और कमंडल होता है। ये देवी ब्रह्मचर्य और ज्ञान की प्रतीक हैं। इनकी पूजा से तप, त्याग, और संयम की भावना जागृत होती है।
दूसरे दिन क्या करें?
🔸 स्नान व ध्यान के बाद संकल्प लें:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का संकल्प लें।
🔸 मां की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें:
घर में पूजा स्थल पर मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
🔸 पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करें:
• रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित करें।
• कमंडल और रुद्राक्ष के साथ मां को चंदन, बेलपत्र और कमल का पुष्प प्रिय होता है।
🔸 मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र जपें:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
🔸 भोग अर्पण करें:
मां ब्रह्मचारिणी को गुड़ और शक्कर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
व्रत के लाभ
इस दिन व्रत रखने से साधक के जीवन में संयम, ज्ञान, और आत्मबल की वृद्धि होती है। विशेष रूप से छात्र और साधक वर्ग को इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।
उपसंहार:
नवरात्रि का हर दिन आत्मशुद्धि और शक्ति के जागरण का प्रतीक है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से जीवन में धैर्य, संयम और अध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से सभी कष्टों का नाश होता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
जय मां ब्रह्मचारिणी!


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