नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- नजफगढ़ विधानसभा के अन्तर्गत आने वाले पांच निगम वार्ड सीटों पर पार्षद बनने की चाह में कांग्रेस व भाजपा छोड़ आम आदमी पार्टी में शामिल हुए दलबदलु नेताओं का रोटेशन ने सारा खेल बिगाड़ दिया है। किसी की सीट महिला हुई तो किसी के एससी में हो गई आरक्षित। ऐसे में दलबदलु नेता फिर से नये जोड़तोड़ में जुट गये है। हालांकि कुछ नेताओं का कहना है कि हमने पार्टी इसलिए बदली थी कि हम अपने वार्ड में काम कर सकें।
राज्य निर्वाचन आयोग ने दिल्ली नगर निगम 2022 के मद्देनजर 272 वार्डों का आरक्षण नए सिरे से घोषित किया तो कांग्रेस के दलबदलुओं का सियासी गणित भी बिगड़ गया। बता दें कि मंगलवार देर शाम राज्य निर्वाचन आयोग ने रोटेशन की स्थिति स्पष्ट की तो अप्रैल में संभावित नगर निगम चुनाव के लिए दावेदारी ठोक रहे ज्यादातर नेताओं की पेशानी पर बल पड़ गए। नजफगढ़ में कमल व हाथ का साथ छोड़कर झाड़ू व कमल थामने वाले उन दलबदलुओं के सामने उलझन खड़ी हो गई जो दूसरी पार्टी से टिकट मिलने की आस में चले गए थे। ये नेता दूसरी पार्टी में गए तो यही सोचकर थे कि उन्हें वहां से टिकट भी मिल जाएगा और वे जीत भी जाएंगे, लेकिन वार्डों का रोटेशन इस तरह हुआ है कि लगभग सभी के चेहरे उतर गए हैं। नजफगढ़ में ऐसे करीब एक दर्जन नेता है जिन्होने कांग्रेस व भाजपा छोड़कर आप का दामन थामा लेकिन अब रोटेशन ने ऐसा खेला बिगाड़ा की अब न घर के रहे न घाट के।
नये रोटेशन के तहत गोपालनगर सीट अब एससी महिला, ईस्सापुर वार्ड एससी, नजफगढ़ जनरल सीट, दिचाउ कलां महिला जनरल व रोशनपुरा महिला रिजर्व में चली गई है। रोशनपुरा से भाजपा के सत्यपाल मलिक वर्तमान में पार्षद है और अब अपनी पत्नी को यहां से चुनाव लड़ाने के मन बना रहे हैं। जबकि इस सीट से ऐसे कई नाम है जैसे ऋतु दहिया कुंडू, अमित गौड़ व उनकी पत्नी साक्षी अमित गौड़, बिजेन्द्र दत्त शर्मा, डा. संजय पाराशर, रणबीर शर्मा, नरेश शर्मा नजफगढ़ मंडी चेयरमैन व डा़ नीरज वत्स व उनकी पत्नी शिक्षा रानी भाजपा छोड़ आप में शामिल होकर टिकट की दावेदारी कर रहे है लेकिन अब महिला सीट हो जाने पर ये नेता अपनी पत्नियों को आगे कर चुनाव लड़ने की जुगत लगा रहे हैं।
नजफगढ़ वार्ड पहले महिला वार्ड था लेकिन अब जनरल वार्ड में बदल गया है जिसकारण इस वार्ड से अब चुनाव लड़ने वाले पुरूष उम्मीदवारों का तांता लगना स्वाभाविक है। पूरी नजफगढ़ विधानसभा में नजफगढ़ वार्ड ही ऐसा बचा है जहां से पुरूष उम्मीदवार चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि अभी वर्तमान में इस सीट से मीना तरूण यादव पार्षद है लेकिन अब देखना यह है कि भाजपा नेता मीना को दौबारा इस सीट पर मौका देंगे या फिर उनके पति तरूण को पार्टी उम्मीदवार बनायेंगी। इस सीट पर पूर्व विधायक अजीत खड़खड़ी के बेटे अमित खड़खड़ी भी चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। वहीं कांग्रेस की पूर्व प्रत्याशी व राजबीर यादव दौबारा यहां से चुनाव लड़ सकते है। वहीं राजबीर डबास जो कि कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हुए थे वो भी अब इस सीट से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे है। वहीं मंजीत दलाल भी आप से टिकट मांग रहे हैं। भाजपा के भी ऐसे अनेक चेहरे है जो नजफगढ़ सीट से टिकट मांग रहे हैं। हरेन्द्र सिंघल ने भी पिछले काफी समय से नजफगढ़ बाजार में अपनी पैठ बनाई है वह भी दबी जबान में यही कह रहे है कि पार्टी अगर उन्हे टिकट देगी तो वो जरूर चुनाव लड़ेंगे।
सबसे ज्यादा टकराव गोपालनगर सीट पर देखा जा रहा है। जहां कांग्रेस व इनेलो छोड़कर कई नेता आप में शामिल हुए और अब टिकट की दावेदारी कर रहे है। हालांकि वर्तमान में भाजपा की अंतिम गहलोत यहां से पार्षद है और उनके पति सूरज गहलोत भी भाजपा के मजबूत कार्यकर्ता है। लेकिन कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी में गये मास्टर मंजीत सिंह, संजय राठी व इनेलो छोड़ भाजपा में शामिल हुए अनिल कालीरवण को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि अब यह सीट एससी महिला रिजर्व हो गई हैं जिसकारण इन नेताओं के पार्षद बनने के सपने चकनाचूर हो गये हैं। वहीं पार्टियों को भी अब नये उम्मीदवार तलाशने की मशक्कत करनी पड़ेगी क्योकि अभी तक पार्टियां भी ऐसे चेहरों पर नजर जमाये हुए थी जो पहले से ही पूरी तैयारी व जनाधार वाले दिख रहे थे। अब हम बात करते है ईस्सापुर वार्ड की जहां भाजपा नेत्री सुमन डागर को तगड़ा झटका लगा है। क्यांकि वह अभी वर्तमाना में ईस्सापुर वार्ड से पार्षद भी है और इस बार भी अपनी मजबूत दांवेदारी ठोक रही थी। अब यह सीट एससी रिजर्व हो जाने के कारण यहां से उम्मीदवारी की उम्मीद लगाये सभी बड़े नेताओं के सपने चकनाचूर हो गये हैं। कुछ लोग तो अब रोटेशन प्रणाली को ही कोस रहे हैं। लेकिन एससी सीट हो जाने के कारण कुछ ऐसे नेताओं की लॉटरी लग गई है जो सपने में भी पार्षद की टिकट पाने की इच्छा ना रख पा रहे हों। एससी कैटेगिरी के नेता अब नये रोटेशन के बाद पूरी तरह से सक्रिय हो गये है। और अपने आकाओं की हाजिरी लगाने में जुट गये हैं।
दिचाऊं कलां सीट ऐसी सीट है जो निर्विवाद भरतसिंह परिवार से जुड़ी रही है। यहां से सबसे पहले भरत सिंह स्वयं पार्षद का चुनाव जीते थे। इसके बाद नीलम कृष्ण पहलवान यहां से पार्षद रही है। और अभी भी यह सीट महिला आरक्षित जनरल है तो उन्ही के पास रहने की उम्मीद लगाई जा रही है। यानी नीलम कृष्ण पहलवान इस सीट पर एक ऐसी प्रत्याशी होगी जिन्हे टक्कर देना आसान नही होगा। हालांकि अब वह भाजपा में शामिल हो चुकी है जिसकारण उनकी स्थिति और भी मजबूत मानी जा रही है। वैसे भी इस सीट पर अभी तक दूसरी पार्टियों के दावेदार सामने नही आये है। अब देखना यह है कि यहां से कौन और किस-किस पार्टी की उम्मीदवार मैदान में आती है।वहीं पूरी दिल्ली में कांग्रेस छोड़कर आप व भाजपा में गये दलबदलुओं की हालत इस समय सबसे खराब मानी जा रही है। लोगों का कहना है ये दलबदलु नेता अब ना धर के रहे ना घाट के। इनमें सबसे बड़ा नाम नार्थ एमसीडी में कांग्रेस दल के नेता रहे मुकेश गोयल का नाम सबसे बड़ा है। मुकेश धीरपुर वार्ड से जीते हुए थे। सराय पीपलथला सीट भी उनके लिए अनुकूल रही है। लेकिन इस रोटेशन में उनका समीकरण भी बिगड़ गया। दोनों ही सीटें महिला आरक्षित हो गई हैं। वहीं, ऐसे ही हेमलता सांगवान की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई, आले मोहम्मद खान की सीट अनुसूचित हो गई, विकास टांक की सीट सामान्य हो गई, सुरेंद्र सेतिया की सीट महिला हो गई, उषा शर्मा की सीट सामान्य हो गई, पूनम बागड़ी, अंजू सहवाग, अजीत यादव, राजेश शर्मा इत्यादि अनेक ऐसे नाम हैं जिनकी सीट रोटेशन में बदल गई है। दिलचस्प यह कि सर्वाधिक मार उन नेताओं पर पड़ी है, जिनकी सीट पहले महिला या सामान्य थी और अब अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की हो गई। ऐसे में पति-पत्नी दोनों में से कोई चुनाव लड़ नहीं पाएगा।
रोटेशन के बाद कुछ दलबदलू नेताओं ने फिर से कांग्रेस का दरवाजा खटखटाया है। इनकी कोशिश है कि अगर नई पार्टी में उनकी दाल नहीं गल पाई तो कम से कम पुरानी पार्टी में तो बात बन ही जाएगी। अनिल चौधरी (अध्यक्ष, दिल्ली कांग्रेस) का कहना है कि कांग्रेस में उम्र बिताकर दूसरी पार्टी में जाने वालों को रोटेशन के जरिये उनकी करनी का फल मिला है। अब कुछ नेता वापस हमारे संपर्क में हैं, लेकिन हमने उन्हें सलाह दी है कि पहले वे वहीं संभावनाएं तलाश लें। बाद में हमारे पास आएं।


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