जलवायु परिवर्तन का असर पूरे विश्व पर है, मौसम का चक्र बदल चुका है 

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

January 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
January 2, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

नई दिल्ली/केवल कृष्ण सलूजा/-     पर्यावरण के विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय एक संवेदनशील और ईको संवेदनशील क्षेत्र के तहत आता है। यहाँ पेड़ अंधाधुंध काटने से पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत गंभीर और हानिकारक हालात उत्पन्न हो सकते हैं। इस चिंता और चेतावनी के बावजूद गंगोत्री राजमार्ग के लिए 6000 से अधिक देवदार के पेड़ काटने की योजना नि:संदेह आपदा को निमंत्रण देना है।

अब बात करते हैं पूरा मामला क्या है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने की योजना के अंतर्गत झाला से जां गला के बीच देवदार के छह हजार से अधिक पेड़ अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। इनका कटना तय माना जा रहा था।

यह कार्य चारधाम सड़क परियोजना के तहत किया जाना है। उत्तरकाशी के चुंगी बड़े थी से भैरव घाटी तक सड़क को चौड़ा किया जा चुका है। इस 90 किमी के मार्ग   को 12 मीटर चौड़ा किया जाना है। यह पांच चरणों में पूरा किया जाएगा।

इस योजना के दूसरे चरण में झाला से सुक्खी प्रथम मोड़ तक सड़क चौड़ी होगी और यहाँ बाईपास भी बनेगा। भागीरथी नदी पर पुल बनाया जाएगा। इन चरणों के अन्य हिस्सों में सुक्खी से तेखला तक और बड़ेथी तेखला के बीच अन्य निर्माण कार्य भी होने है।

प्राकृतिक आपदाएं बढ़ने से उत्तराखण्ड में हालत चिंताजनक है। गहराते संकट आश्वासन देने से कम नहीं हो जाते। सरकार कब सबक लेगी। कल्पना करें हजारों पेड़ साफ कर दिए गए तो पर्यावरण के साथ- साथ वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी गहरा असर पड़ेगा। बाघ, भालू, सियार आबादी शहरों में घुस जाएंगे। भूख मिटाने के लिए आबादी और पशुओं पर हमला करेंगे। उत्तराखंड के गांवों में यह आम हो गया है। बाघ आते हैं गाय और कुत्तों को अपना शिकार बना रहे हैं।

पेड़ों की कटाई के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। यह परियोजनाओं के नाम पर हो रहा है। प्रदेश में पेड़ काटने के नियम बदल चुके हैं। देवदार, पीपल, साल, चीड़ आदि किस्मों को छोड़कर जिनकी निजी जमीन पर अन्य पेड़ हैं वे धड़ल्ले से जमीन साफ कर रहे हैं। उन्हें भविष्य के भयंकर परिणामों की कोई चिंता नहीं है।

जोरदार विरोध हुआ पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी कह चुके हैं कि हिमालय है तो हम हैं। देश तभी सुरक्षित है जब हिमालय कायम है। हिमालय का विकास, सुरक्षा और संरक्षण को अलग नहीं किया जा सकता। न इसे राजनीति का विषय बनाया जाये। यह राष्ट्रीय समस्या है। इसके निदान में विलंब घातक साबित होगा।

यह उत्तराखण्ड की नहीं देश की जिम्मेदारी है। 56 हजार से अधिक पेड़ों को काटा जाना साधारण बात नहीं। अभी हजारों पर कुल्हाड़ी चलायी जानी है। इसका विरोध करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने अभियान शुरू किया है। चिपको आंदोलन शुरू करने के लिए हजारों लोग सड़क पर उतर चुके हैं। पर्यावरणविद ही नहीं, महिलाएं, युवाओं ने आवाज बुलंद की है। अन्य राज्यों के लोग भी शामिल हुए हैं। पेड़ों की पूजा करने के बाद उन्हें रक्षा सूत्र बांधे गये हैं।

हिमालय है तो हम हैं, इसके तहत एकत्र हो कर लोग विरोध जता चुके हैं। एनवायरनमेंटल ग्रुपों के विरोध के बाद गंगोत्री हाइवे को चौड़ा करने का काम बीच में रोका गया।

बिना सेफ गार्ड्स के यदि यह प्रोजेक्ट जारी रहेगा तो भागीरथी इको सेंसटिव जोन में ऐसा इकोलॉजीकल डैमेज होने की आशंका बनी रहेगी जिसे सुधारना कठिन हो जाएगा। सिविल सोसायटी मेंबर्स ने धरा ली में हुए हादसे का उदाहरण देते हुए चेताया है। सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस गव ई को अपील भी भेजी है।

बता देंउत्तरकाशी के धराली में 5 अगस्त को दोपहर के पौने दो बजे बादल फट गया था। खीर गंगा नदी में बाढ़ आने से 34 सेकेंड में धराली गांव जमींदोज हो गया था। सरकार के अनुसार कुल 43 लोग लापता हो गये थे। इनमें से एक ही शव मिल पाया।

पेड़ों की कटाई के सटीक आंकड़े मिलना तो कठिन है, लेकिन इस पर तत्काल रोक से बहुत बड़ी क्षति को रोका जा सकता है। इससे उत्तराखण्ड के जितने नाजुक मोड़ हैं उन्हें सुरक्षित बनाना संभव है। चार धाम रोड को चौड़ा करने की परियोजना पर विशेषज्ञों को मंथन करना चाहिए।

हाल ही में कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की और राज्य सरकार और NHAI से से सुझाव मांगे हैं. उत्तरखण्ड हाईकोर्ट ने एनएचएआई के द्वारा ऋषिकेश के भानियावाला में बनाए जा रहे फोर लेन सड़क की जद में आ रहे करीब 3400 पेड़ों के कटान के मामले पर सुनवाई की थी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुरूप पेड़ो का ट्रांसप्लांट नही हुआ है और न ही नियमो के तहत अंडर पास बनाये जा रहें है. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार व एनएचएआई से कहा है कि इस समस्या को हल करने के लिए बैठक कर सुझाव कोर्ट में पेश करें.

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 30 दिसंबर को पेड़ काटने के मामले में हुई सुनवाई के बाद, अदालत ने राज्य और केंद्र सरकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को एक संयुक्त बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है।
इस बैठक का उद्देश्य ऋषिकेश और भानियावाला के बीच 4-लेन सड़क परियोजना के लिए लगभग 4,400 पेड़ों के प्रस्तावित कटान से संबंधित मुद्दों को हल करना और अपने सुझाव न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox