पानी का स्टॉक कर पीने को मजबूर है झाड़ौदा निवासी

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2022
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
2627282930  
September 26, 2022

हर ख़बर पर हमारी पकड़

पानी का स्टॉक कर पीने को मजबूर है झाड़ौदा निवासी

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/- पिछली लोकसभा के दौरान सांसद द्वारा झाड़ौदा गांव को आदर्श गांव घोषित किये जाने व दिल्ली सरकार द्वारा पेयजल के नाम पर सभी गांवों व कालोनियों को टैंकर मुक्त किये जाने की घोषणा के बावजूद भी अभी तक झाडौदा गांव की पेयजल सप्लाई टैंकरों पर ही टिकी है। इतना ही नही सप्ताह में एक बार टैंकर के आने के कारण ग्रामीण पानी का स्टॉक कर पीने को मजबूर है। वहीं टैंकर के लिए भी ग्रामीणों को पूरा दिन इंतजार करना पड़ता है। हालांकि ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए नजफगढ़ विधायक व परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने गांव में पानी की लाईन डालने का काम शुरू करवाया था जिसके चलते आधे गांव में पानी की लाईन डल भी गई थी लेकिन अब काम रूका हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पानी की लाईन भी राजनीति भेंट चढ़ गई है और नेता नहीं चाहते की गांव में कोई सुविधा मिले।

इस संबंध में बाबा हरिदास लोक सेवा मंडल के उपाध्यक्ष हरबीर सिंह ने बताया कि सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने पिछली लोकसभा में गांव को आदर्श गांव घोषित किया था। लेकिन गांव में पांच साल के अंतराल में कोई भी विकास का कार्य नही हुआ। यहां तक की ग्रामीणों की सालों पुरानी पानी की मांग को भी सांसद पूरा नही कर पाये। गांव में बाबा हरिदास मंदिर पर लगने वाले मेले के लिए भी कोई नई सुविधा मुहैया नही कराई गई। गांव में न कोई लाईब्रेरी है और न ही कोई चिकित्सालय है। गांव की गलियां व नालियां भी टूटी पड़ी है। वहीं सुरेश कुमार व बिट्टू डागर ने बताया कि दिल्ली सरकार दावा कर रही है कि अब किसी भी गांव में पेयजल व्यवस्था टैंकर पर आधारित नही है लेकिन झाड़ौदा गांव में अभी भी पानी की सप्लाई टैंकर से ही होती है और वह भी सप्ताह में एक बार टैंकर आता है। जिसकारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होने कहा कि टैंकर से पानी ले पाना भी कोई आसान काम नही होता। इसके लिए भी लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई बार तो पानी पर आपस में झगड़ा भी हो जाता है। उन्होने बताया कि गांव में पिछले दो साल से पानी की लाईन दबाई जा रही है। लेकिन लगता है कि अब यह पेयजल लाईन भी राजनीति का षिकार हो गई है क्यांकि आधे गांव में लाईन डालने के बाद काम रूक गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नेता गांव में सिर्फ वोट मांगने आते है और बड़े-बड़े वादे भी करते है। लेकिन इसके बाद फिर गांव की तरफ देखते भी नही। लोगों ने कहा कि क्षेत्रिय सांसद व विधायक गांव में विकास के दावें तो कर रहे हैं लेकिन ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए अभी तक कोई पुख्ता प्रबंध नही कर पाये है। जिसकारण ग्रामीणों में काफी रोश व्याप्त है।

Subscribe to get news in your inbox