नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त मौका नहीं दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है। शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बाबत हलफनामा देने के लिए कहा है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी है। बता दें कि कुछ उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट से कोरोना महामारी के प्रभाव के कारण अभ्यर्थियों को यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए अतिरिक्त मौका दिए जाने की मांग से की है।
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा लिए किसी भी प्रकार से अतिरिक्त प्रयास उन उम्मीदवारों को नहीं दिया जाएगा, जिन्होंने अक्तूबर में आयोजित की गई परीक्षा में भाग लिया था अथवा कोविड-19 महामारी के कारण वे परीक्षा में भाग नहीं ले सके। इस संबंध में एक मांग याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से उनका पक्ष जानना चाहा था।
न्यायालय में जवाब दाखिल करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि सरकार से जानकारी मिली है कि सरकार अतिरिक्त मौका देने को लेकर सहमत नहीं है। न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली एक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को 25 जनवरी, सोमवार तक एक हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई भी 25 जनवरी, सोमवार तक स्थगित कर दी है।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा, कल रात, मुझे केंद्र सरकार से जानकारी मिली कि वे कोरोना महामारी के प्रभाव के कारण अभ्यर्थियों को यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए अतिरिक्त मौका दिए जाने को लेकर सहमत नहीं हैं। मैं एक हफ्ते में शपथ पत्र पर यह कहना चाहूंगा। इस पर, पीठ ने आवेदनों की अंतिम तिथि के बारे में पूछताछ की। तदनुसार, एएसजी ने सहमति व्यक्त कि वह सोमवार तक शपथ पत्र दायर करेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले कि सुनवाई में, एएसजी ने न्यायालय से समय देने की मांग की थी, क्योंकि केंद्र ने कहा था कि यह मुद्दा केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग के बीच सक्रिय तौर पर विचाराधीन था। तब कोर्ट ने सभी पक्षकारों को निर्देश दिया था कि किसी भी परिस्थिति में फॉर्म भरने की आखिरी तारीख तक देरी नहीं होनी चाहिए। हालांकि, एएसजी ने फरवरी के पहले सप्ताह तक के लिए समय मांगा था, लेकिन पीठ ने कहा कि उन्हें जल्द ही जवाब मिलने चाहिए।
इससे पहले 18 दिसंबर, 2020 को सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया था कि केंद्र अतिरिक्त अवसर की दलील के संबंध में एक विचार कर रहा है और इस संबंध में निर्णय तीन या चार सप्ताह के भीतर होने की संभावना है। अतिरिक्त नियमों को मंजूरी देने के लिए नियमों में संशोधन की आवश्यकता हो सकती है। इससे पूर्व 30 सितंबर को, शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया था कि वे उम्मीदवारों को एक अतिरिक्त मौका देने पर विचार करें, क्योंकि यह उनके लिए ऊपरी आयु-सीमा के तहत यह 2020 में अंतिम प्रयास है।


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