-हरियाणा में सत्ता की चाह में आखिर हुड्डा के सामने नतमस्तक हुई कांग्रेस, हुड्डा के करीबी है उदयभान
-कुमारी सैलजा ने दिया इस्तीफा, चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाये गये
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- हरियाणा में बुधवार को आखिर कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा फेरबदल करते हुए हरिधाणा कांग्रेस को स्थायित्व देने के लिए उदयभान को हरियाणा कांग्रेस का अध्यक्ष घोषित किया है। आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने उदयभान के सहारे बड़ा दांव खेलने की कोशिश की है। हालांकि चर्चा यह भी है कि सत्ता के लालच में कांग्रेस आखिर हुड्डा के सामने नतमस्तक हो गई। लेकिन फिर भी भूपेन्द्र हुड्डा व दिपेन्द्र हुड्डा को अध्यक्ष बनाने की बजाये बीच का रास्ता निकालते हुए उदयभान को कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया है। नये कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान हुड्डा के करीबी बताये जा रहे हैं। इसके साथ ही हरियाणा में जातिगत समीकरण को देखते हुए चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गये है। वहीं वर्तमान अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कांग्रेस ने पंजाब और हिमाचल के बाद हरियाणा में भी बड़ा बदलाव किया है। कुमारी शैलजा के स्थान पर अब उदयभान को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, जो भूपिंदर सिंह हुड्डा के करीबी माने जाते हैं। वह होडल सीट से कई बार के विधायक हैं और दलित समुदाय से ही आते हैं। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। इसके साथ ही चार कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। बताया जा रहा है कि उदयभान हुड्डा खेमे से हैं। श्रुति चौधरी, रामकिशन गुर्जर, जितेंद्र भारद्वाज व सुरेश गुप्ता को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। कहा जा रहा है कि इन सब में जातीय समीकरण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। दलित अध्यक्ष को हटाकर पार्टी ने दलित को ही पार्टी की कमान सौंपी है। उदयभान हरियाणा के होडल से विधायक रहे हैं। उनके पिता गया राम भी विधायक रह चुके हैं।
जानकारी के अनुसार कुमारी सैलजा पिछले हफ्ते ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिली थीं और उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा था। जिसके बाद सोनिया गांधी ने कुमारी सैलजा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और उदयभान को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पहली बार लोक दल बहुगुणा से हसनपुर से विधायक बने, अनसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित है। (अब इसी सीट को होडल सीट के नाम से जाना जाता है)। 1990 में कृभको के चैयरमैन बने, पुनः 2000 में निर्दलीय विधायक बने, 2005 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने, 2014 में पुनः कांग्रेस के विधायक बने और अब हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं।
भूपेंद्र हुड्डा के सामने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा की नहीं चली। वह प्रदेश में संगठन नहीं खड़ा कर सकीं। इससे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर और हुड्डा खेमे के बीच विवाद जगजाहिर है। तंवर भी प्रदेश में अपना संगठन खड़ा नहीं कर सके थे। हालांकि बाद में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ही अलविदा कह दिया। तंवर के बाद पार्टी ने कुमारी सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। मगर हालात तब भी नहीं बदले। हुड्डा और सैलजा गुट के बीच खींचतान जारी रही।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश अध्यक्ष का पद अपने नजदीकी को दिलवाने में कामयाब रहे। पार्टी ने उनकी पंसद के नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी है। जबकि कुलदीप बिश्नोई खुद इस पद पर काबिज होना चाह रहे थे। मंगलवार को संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल और कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने अलग-अलग बैठक भी की थी। मगर बिश्नोई नहीं चल सकी।
कुमारी सैलजा ने ट्वीट किया, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर श्री उदय भान जी को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं देती हूं। कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर श्रीमती श्रुति चौधरी जी, श्री रामकिशन गुर्जर जी, श्री जितेंद्र भारद्वाज जी, श्री सुरेश गुप्ता जी को भी शुभकामनाएं देती हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी और जनता की आवाज को पुरजोर तरीके से उठाएगी।



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