नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- इस बार का विश्व पुस्तक मेला बच्चों व साहित्य प्रेमियों को काफी लुभा रहा है। मेले में सुदूर देशों की संस्कृति से रूबरू कराने वाली किताबें भी साहित्य प्रेमियों को खूब लुभा रही हैं। 30 देशों की किताबें वहां की संस्कृति, साहित्य, पर्यटन और रहन-सहन का आईना ही नहीं हैं, बल्कि वहां के व्यवहार एवं विचाराधारा की भी झलक प्रस्तुत करती है। इन सभी देशों को हाल नंबर पांच में बनाए गए विदेशी मंडप में जगह दी गई है। वही दूसरे देशों की कॉमिक्स की पुस्तकें भी बच्चों को लुभा रही हैं।
मेले में फ्रांस को अतिथि देश का दर्जा दिया गया है। ऐसे में इसका मंडप भी सबसे बड़ा एवं अलग है। मेले में विभिन्न भाषाओं में फ्रेंच साहित्य की 2000 से अधिक पुस्तकें उपलब्ध हैं। फ्रेंच इंस्टीटयूट आफ इंडिया में पुस्तक विभाग की प्रमुख जूलिया ने बताया कि यहां पर प्रदर्शित पुस्तकों में युवा कल्पना, बाल व किशोर कल्पना, प्रेम, लोकाचार और बच्चों की किताबों सहित कई साहित्यिक विधाओं सहित ग्राफिक उपन्यास
भी शामिल है। यह पवेलियन कैफे के साथ-साथ एक फ्रांसीसी किताबों की दुकान जैसा दिखता है। वजह, फ्रांस में बुक स्टोर्स का एक बड़ा नेटवर्क है। कैफे की भी लेखकों और बुद्धिजीवियों के लिए बैठक बिंदु के रूप में लंबी परंपरा रही है।
जूलिया ने बताया कि फ्रांस और भारत साहित्य के दो महान राष्ट्र हैं और हम अपने लेखकों, प्रकाशकों के बीच घनिष्ठ संबंध बनाने में विश्वास करते हैं। विश्व पुस्तक मेला फ्रांस की भागीदारी के लिए एक अवसर है, जब हम कुछ बेहतरीन और सबसे विविध फ्रेंच साहित्यिक कार्यों तक भारतीयों की सीधी पहुंच बना सकें। हम यह भी चाहते हैं कि सभी प्रतिभागियों के लिए यह मेला एक सुखद अनुभव हो।
’पुस्तकों की चर्चाओं में भी जुट रही भीड़
विश्व पुस्तक मेला में पुस्तक प्रेमियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुस्तकों पर हो रही लेखकों द्वारा चर्चा को सुनने के लिए भी पाठकों की भीड़ देखने को मिल रही है। बृहस्पतिवार को सबसे अधिक युवाओं की भीड़ चर्चा केंद्रों पर ही देखने को मिली। लेखक मंच पर कहानीकार दीर्घ नारायण के उपन्यास “रामघाट में कोरोना“ का लोकार्पण संपन्न हुआ। यह उपन्यास किताबघर प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। कोरोनाकालीन भारतीय जनजीवन के विविध व विहंगम पक्षों का इस उपन्यास में जीवंत चित्रण हुआ है। इसमें भारतीय जनमानस व जनजीवन की परिस्थितियां व मनः स्थितियों और भारतीय जनमानस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं की गहरी व गंभीर पड़ताल की गई है। लोकार्पण समारोह के प्रमुख अतिथियों में विख्यात आलोचक वीरेंद्र यादव, प्रतिष्ठित कहानीकार उपन्यासकार शिवमूर्ति, कथादेश पत्रिका के संपादक हरिनारायण,कहानीकार उपन्यासकार महेश कटारे और स्वयं लेखक दीर्घ नारायण मंचासीन रहे। इस अवसर पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त वरिष्ठ न्यायाधीश श्री सखाराम सिंह की प्रमुख उपस्थिति रही। साथ ही सेवानिवृत्त जिला जज मंगल प्रसाद यादव जी भी मंच पर उपस्थित थे। मंच संचालन सीएबी इंटर कॉलेज मेरठ के वरिष्ठ शिक्षक श्री राजेंद्र प्रसाद ने किया। प्रभात प्रकाशन के स्टाल पर लेखिका सुमन बाजपेयी की किताब ’हमारी तुम्हारी लव स्टोरीज’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार और पीयूष कुमार भी मौजूद रहे। सुमन बाजपेयी ने कहा, “प्रेम इंसान को बेहतर बनाने वाला भाव है और इस किताब की कहानियां आम जन के चारों ओर ही बुनी गईं हैं।“
भारत तुर्किए के गृहदेश जैसा : फिरत सुनैल
तुर्किए के स्टाल पर वहां के साहित्य का विभिन्न भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद उपलब्ध है। वर्तमान में उनकी पुस्तकों का मलयालम में भी अनुवाद किया जा रहा है। इस्तांबुल स्थित कलेम लिटरेचर एजेंसी के संचालक फिरत सुनैल ने बताया कि भारत तुर्किए के गृहदेश जैसा ही है। वजह, दोनों देशों के के करीब नौ हजार शब्द एक समान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों का साहित्य एक-दूसरे को समीप लाता है, आपस में जोड़ता है।


More Stories
पश्चिम एशिया संकट की गूंज से दलाल स्ट्रीट में हड़कंप
पश्चिम एशिया में बढ़ा टकराव: भारत ने कनाडा से की चर्चा
अमित शाह ने तुष्टिकरण और कर्ज को लेकर राज्य सरकार पर साधा निशाना
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव पर प्रधानमंत्री की अपील
एक ही दिन चार शहरों में बीआरजी धावकों की दमदार मौजूदगी
दिल्ली में करण औजला के संगीत कार्यक्रम के दौरान हंगामा