-2014 में भी अमेरिका के डॉलर ने पकड़ी थी मजबूती, अमेरिकी हथियारों व सामान की बढ़ेगी मांग
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/देश-विदेश/शिव कुमार यादव/- रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में अब नफा-नुकसान का आकलन भी सामने आने लगा है। वैसे तो रूस इस युद्ध को वर्चस्व के लिए लड़ रहा है लेकिन उसे इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं अमेरिका को इस युद्ध से सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है। ग्लोबल टाइम्स अपनी एक रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि अमेरिका इस युद्ध से परेशान नही बल्कि मालामाल हो जायेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2021 में यूरोपियन यूनियन को रूस से गैस का कुल निर्यात 199.6 बिलियन घन मीट्रिक सालाना था। जो कि इसके कुल निर्यात का 81 फीसदी है। अब यूक्रेन क्राइसिस के चलते यूरोप को रूस का गैस निर्यात घटकर 72.6 बिलियन घन मीट्रिक सालाना रह जाएगा। अब इस अंतर को अमेरिका भर सकता है। 2022 में उसका उत्पादन 1 ट्रिलियन घन मीट्रिक हो चुका है और वह शिद्दत से खरीदारों की तलाश में है।
वहीं रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई का अमेरिका को दूसरा बड़ा फायदा डॉलर की मजबूती के रूप में होगा। असल में साल 2014 में यूक्रेन क्राइसिस के दौरान ऐसा हो चुका है। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार ऐसा ही होगा क्योंकि इस लड़ाई के चलते अब यूरोप को सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। बता दें कि साल 2014 में यूक्रेन क्राइसिस के बाद फरवरी से दिसंबर के बीच दुनिया की मेन करेंसीज की तुलना में डॉलर के एक्सचेंज रेट में 8.7 फीसदी का इजाफा हुआ था।
यूक्रेन में जारी लड़ाई के चलते यूरोपियन देश रूस के खिलाफ तमाम प्रतिबंध जारी कर रहे हैं। इससे इन देशों से रूस के बीच व्यापार पर भी असर पड़ना तय है। वहीं अमेरिका इस बात को लेकर निश्चिंत है। इसकी वजह यह है कि रूस के साथ उसके बहुत ज्यादा व्यापारिक ताल्लुकात नहीं है। इसे इस आंकड़े से समझा जा सकता है कि 2021 में रूस और यूरोपियन यूनियन के देशों के बीच कुल 282 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ। यह रूस के कुल व्यापार का 35.7 फीसदी था। वहीं अमेरिका से महज 34.4 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ जो यूरोपियन यूनियन के देशों का महज आठवां हिस्सा हैं।
यूक्रेन और रूस के बीच जारी टेंशन के बीच कई देश यूक्रेन को हथियार उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं इस युद्ध के चलते यूरोप में तनाव बढ़ा है। जर्मनी ने अपने रक्षा बजट को 100 बिलियन यूरो तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह उसके जीडीपी के कुल दो फीसदी से ज्यादा है।


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