भारत-पाक युद्ध के बलिदानी पिता को वीरता पुरस्कार दिलाने के लिए बेटा लड़ रहा लड़ाई

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  
March 2, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

भारत-पाक युद्ध के बलिदानी पिता को वीरता पुरस्कार दिलाने के लिए बेटा लड़ रहा लड़ाई

-1965 के भारत-पाक युद्ध में मरणोपरांत पदोन्नत होने वाले मेजर मोहन सिंह के लिए सेवानिवृत ब्रिगेडियर बेटे ने दिल्ली हाईकोर्ट में डाली याचिका

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- वर्ष 1965 में भारत-पाक युद्ध में अपनी अभूतपूर्व साहस के कारण दुश्मनों धूल चटाकर अपने  प्राणों की आहुति देने वाले कैप्टन मोहन सिंह को मरणोपरांत उनकी वीरता को सलाम करते हुए उन्हे पदोन्नत कर मेजर का पद दिया गया था। सेना की इसी कार्यवाही को आधार बनाते हुए अपने पिता यानी मेजर मोहन सिंह को वीरता पुरस्कार दिलाने के लिए उनका बेटा ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) एनबी सिंह लड़ाई लड़ रहे हैं। एनबी सिंह की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सैन्य मुख्यालय स्थित सम्मान और पुरस्कार समिति से उनके प्रतिवेदन पर विचार करने को कहा है। न्यायमूर्ति नज्मी वजीरी व न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन की पीठ ने कहा कि समिति प्रक्रिया में तेजी लाकर तीन महीने के भीतर अपना फैसला देने पर विचार कर सकती है।
                 हालांकि, अदालत ने कहा कि यह मामला अद्वितीय है, लेकिन लगभग 58 साल पहले हुए युद्ध से जुड़ा होने के कारण इस आदेश को एक मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा। याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि मोहन सिंह जब बलिदान हुए तो कैप्टन पद पर थे और मरणोपरांत उन्हें मेजर का पद दिया गया था। ऐसे में यह अपने आप में सैनिक के वीरतापूर्ण कार्य की स्वीकारोक्ति है। हालांकि, उपयुक्त समिति की ओर से अब तक मोहन सिंह को वीरता पुरस्कार देने पर विचार नहीं किया गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि मामले को तार्किक निष्कर्ष पर ले जाकर वीरता पुरस्कार दिया जाना चाहिए। तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने एनबी सिंह को निर्देश दिया कि वे तीन सप्ताह के भीतर ऐसे अतिरिक्त दस्तावेज या अभ्यावेदन समिति के समक्ष पेश करें, जिन पर वह भरोसा करते हैं। साथ ही सम्मान और’ पुरस्कार समिति याचिका को प्रतिवेदन के तौर पर लेकर आदेश की प्राप्ति की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर अपना निर्णय दे सकती है। याचिका में एनबी सिंह ने कहा कि उनके पिता एक गैर- लड़ाकू सैनिक थे और वीरतापूर्ण परिस्थितियों में बलिदान दिया था। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1965 के युद्ध में जिस स्थान पर वह गंभीर रूप से घायल होकर गिरे थे वह नियंत्रण रेखा (एलओसी) बन गई। उन्होंने कहा कि उनके पिता का नाम अब इंडिया गेट के पास स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में मिलता है।                         केंद्र सरकार के वकील ने प्रस्तुत किया कि भारतीय सेना को अपने सैनिकों पर गर्व है और उन्हें हर संभव तरीके से सम्मानित करता है और उनके वीरतापूर्ण कार्यों को विधिवत स्वीकार किया जाता है और बहादुरी के कार्य पर विचार करने के बाद वीरता पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox