नई दिल्ली/सिमरन मोरया/- वक्फ संशोधन कानून को लेकर देश में जारी सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी अब मोर्चा संभालने को तैयार है। विपक्ष और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच बीजेपी 20 अप्रैल यानी आज से 5 मई तक देशभर में वक्फ संशोधन जनजागरण अभियान चलाएगी। इस अभियान के जरिए पार्टी वक्फ कानून में किए गए संशोधनों की व्याख्या करेगी और मुस्लिम समाज के बीच जाकर सच्चाई बताने का दावा करेगी।

भारतीय जनता पार्टी अब वक्फ संशोधन कानून को लेकर विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए मैदान में उतर चुकी है। इस अभियान के तहत बीजेपी नेता और कार्यकर्ता विशेष रूप से मुस्लिम समाज के बीच जाकर यह समझाएंगे कि नए वक्फ संशोधन में ऐसा कुछ नहीं है जो किसी धार्मिक स्थल को प्रभावित करता हो या समुदाय की आस्था को चोट पहुंचाता हो।
वक्फ संशोधन कानून को लेकर मैदान में उतरी बीजेपी
दिल्ली में आयोजित पार्टी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और बाकी वरिष्ठ नेताओं ने देशभर से आए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। बैठक में तय हुआ कि विपक्ष और कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा इस मुद्दे को हिंदू बनाम मुस्लिम का रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि संशोधन का मकसद केवल पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाना है। कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे कैसे मुस्लिम समाज को तथ्यात्मक जानकारी दें और राजनीतिक भ्रमजाल को तोड़ें।

दुष्यंत कुमार गौतम ने पोस्ट कर अभियान के बारे में जानकारी दी और इसकी शुरुआत भी कि उन्होंने लिखा- ‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 के जरिए इस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। भुवनेश्वर स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित “वक्फ सुधार जनजागरण अभियान” की कार्यशाला को संबोधित किया।’
कांग्रेस ने अभियान को बताया डैमेज कंट्रोल
वहीं कांग्रेस इस पूरे अभियान को एक डैमेज कंट्रोल करार दे रही है। प्रदेश प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि बीजेपी अपने ही फैसलों की वजह से बैकफुट पर है। उन्होंने इसे किसानों के खिलाफ लाए गए कृषि कानूनों जैसा बताया, जिसमें जनता के गुस्से के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा था। अब बीजेपी जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोग इस बार सवाल जरूर पूछेंगे। वक्फ संशोधन कानून पर यह अभियान आने वाले महीनों में सियासत की दिशा तय कर सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है।


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