दिल्ली के 67 फीसदी लोगों ने किराये के घर की बजाये अपना घर खरीदने को दी प्राथमिकता

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दिल्ली के 67 फीसदी लोगों ने किराये के घर की बजाये अपना घर खरीदने को दी प्राथमिकता

-गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस के पोस्ट ’जेनरेशन-रेंट’ अध्ययन में हुआ खुलासा, 43 फीसदी लोगों ने पिछले एक साल में नये घर के लिए होम लोन प्रदाताओ को तलाशा -सुरक्षित भविष्य के लिए खुद का घर महत्वपूर्ण,, 41 फीसदी लोगों का मानना

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली के 67 फीसदी लोग महामारी के बाद की दुनिया में अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अब किराए पर घर लेने के बजाय अपनी संपत्ति के मालिक होने को प्राथमिकता दे रहे हैं। गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस (जीएचएफ) के पोस्ट ’जनरेशन-रेंट’ अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। उपभोक्ता की पसंद में बदलाव और उसके कारकों, जो भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा महामारी के बाद की दुनिया में अपने भविष्य को सुरक्षित करने हेतु संपत्ति की खरीद, संपत्ति निर्माण और निवेश के तरीके पर विचार करने के लिए निर्णय लेने में प्रेरक थे, के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए यह अध्ययन किया गया था। अध्ययन ने आगे खुलासा किया कि शहर के 43 फीसदी लोगों ने पिछले एक साल में नए घर और होम लोन प्रदाता की तलाश शुरू कर दी है। 29 फीसदी का मानना है कि नया घर खरीदना इस समय निवेश का सबसे अच्छा विकल्प है। अध्ययन से यह भी पता चला है कि 22 फीसदी नागरिकों को लगता है कि अपना खुद का घर खरीदना उनके व्यक्तिगत भविष्य को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि प्रथम वरीयता करियर (41फीसदी) को दी गयी। उत्तरदाताओं ने गृह ऋण प्राप्त करने से पहले वित्तपोषण कंपनी की नीति, विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर लचीलेपन को महत्वपूर्ण कारक माना।

’जेनरेशन-रेंट’ दुनिया भर में मिलेनियल्स से जुड़ी एक अच्छी तरह से प्रलेखित तथ्य है, जो कंज्यूमर ड्युरेबल्स और यहां तक कि आवास के संदर्भ में भी उन्हें खरीदने के बजाये किराये पर लेना पसंद करते हैं। पूर्व धारणाओं के बिल्कुल विपरीत, अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि लगभग 76 प्रतिशत भारतीय अब निवेश और जीवन शैली के विकल्प के रूप में किराए के बजाय संपत्ति का मालिक होने की योजना बना रहे हैं। गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस के पोस्ट ’जेनरेशन-रेंट’ के अध्ययन से पता चला है कि लगभग आधे भारतीयों (49.13फीसदी) ने पिछले एक साल में अपना घर तलाश करने की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करना और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से संपर्क करना शुरू कर दिया था। 32.9 फीसदी का मानना है कि नया घर खरीदना वर्तमान में सबसे अच्छा निवेश विकल्प है, जबकि 16 फीसदी ने बताया कि घर खरीदना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है क्योंकि घर से काम करना अब नया नॉर्मल बन चुका है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि 25.5 फीसदी भारतीयों ने ’व्यक्तिगत सुरक्षा’ को परिभाषित करते हुए अपना घर होने को द्वितीय वरीयता दी, जबकि 40.6 फीसदी ने नौकरी की सुरक्षा को प्रथम वरीयता दी।

निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, मनीष शाह, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस ने कहा, “महामारी ने भारतीय उपभोक्ताओं की वरीयताओं में स्पष्ट बदलाव लाया है। वे लंबी अवधि के निवेश के जरिए फ्यूचर-प्रूफिंग की ओर बढ़ रहे हैं। वर्तमान में सामर्थ्यता सर्वोच्च होने के साथ, घर खरीदने का इससे बेहतर समय शायद कभी नहीं रहा, जो परिसंपत्ति आवंटन का एक महत्वपूर्ण तत्व और वित्तीय सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ दोनों है। उन्होंने कहा, ग्राहकों का मानना है कि इस परिवर्तन के लिए उनके वित्तीय भागीदार से इस दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के माध्यम से सलाह देने और मार्गदर्शन करने के लिए उनके समर्थन की आवश्यकता है। अध्ययन ने उत्पाद डिजाइन और वितरण दोनों में नवाचार, लचीलेपन और डिजिटल विकल्पों की पेशकश करने की हमारी आवश्यकता को फिर से पुष्टि की ताकि गृहस्वामी को बेहतर ढंग से सुविधा प्रदान की जा सके और ग्राहक के वित्तपोषण अनुभव को आसान बनाया जा सके।“

अध्ययन में आगे पता चलता है कि नीति में लचीलापन, ब्रांड की विश्वसनीयता और पारदर्शिता, डिजिटल पेशकश और प्रोसेसिंग के लिए सापेक्ष टर्नअराउंड समय ऐसे प्रमुख कारक हैं जो वित्तपोषण भागीदार के चयन को प्रभावित करते हैं। इसका श्रेय उपभोक्ताओं को डिजिटल प्रौद्योगिकी द्वारा सहायता प्राप्त अपनी आवश्यकताओं की ऑन-डिमांड संतुष्टि के अभ्यस्त होने को दिया जा सकता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि आज के फाइनेंसिंग ब्रांड्स के चुनाव में उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल-फर्स्ट और फ्रिक्शनलेस प्रक्रियाओं को अधिक तवज्जो दी जाती है। समग्र डिजिटल समाधान प्रदान करने वाली कंपनियों और सेवाओं कोपारंपरिक वित्तपोषण मॉडल की तुलना में अधिक बढ़त हासिल है।

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