खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन को अपनाये किसान व युवा

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March 12, 2026

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खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन को अपनाये किसान व युवा

-किसानों की आय बढ़ाने व युवाओं को रोजगार प्रदान कर सकता है मधुमक्खी पालन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कृषि विज्ञान केंद्र उजवा एवं राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन, भारत सरकार की योजना के अन्तर्गत किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एस के मल्होत्रा, कृषि आयुक्त, कृषि और सहकारिता और किसान कल्याण विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, ने कहा कि भारत सरकार ने किसानों की आय दुगुनी करने के लिए खेती के साथ-साथ दूसरी व्यवसाय अपनाने पर भी बल दिया है इसके लिए सरकार ने विभिन्न योजनाऐं भी किसानों के लिए चला रखी है। उन्होने मधु मक्खी पालन को फायदे का सौदा बताते हुए कहा कि युवा व किसान इस योजना से काफी फायदा कमा सकते है।  कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डा. सुशील कुमार सिंह, निदेशक, भा.कृ.अनु प – भारतीय कृषि अनुप्रयोग संस्थान, जोन-2, जोधपुर (राजस्थान), डा. बलराज सिंह, समन्वयक, अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (मधुमक्खियां और परागणकर्ता), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पुसा, भारत सरकार, नई दिल्ली, श्री मधुप व्यास, भा.प्र.स,े सचिव-सह-आयुक्त, विकास विभाग, दिल्ली सरकार, श्री आर. वी. रामाकृष्णा, महाप्रबंधक, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), नई दिल्ली के रूप में उपस्थित हुए।


                              कार्यक्रम के शुरुआत डॉ प्रमोद कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा एवं निदेशक, राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, ने सभी गणमान्य अतिथियों, प्रख्यात वैज्ञानिक गणों एवं किसान भाई बंधुओं का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हार्दिक स्वागत किया एवं केंन्द्र द्वारा आयोजित वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में विस्तृत रूप से प्रतिभागियों को जानकारी दी।
                              कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. एस के मल्होत्रा ने हमारे देश के राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन की योजनाओं एवं परिदृश्य एवं भविष्य में राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन की कार्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी से अवगत करवाया। उन्होंने मधुमक्खी पालन की शुरुआत करने वाले उधमी व प्रशिक्षणार्थियों को मधुमक्खी से गुणवत्ता युक्त शहद उत्पादन के साथ शहद की प्रोसेसिंग एवं विपणन के संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि शहद उत्पादन एवं मधुमक्खी पालन एवं मधुमक्खी पालको को आने वाली समस्याओं के बारे में वर्तमान में अनुसंधान की आवश्यकता है। उन्होनें देश भर में शहद की बेहत्तर गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन हेतु व जांच के लिए परिक्षण केंद्र खोलने की योजनाओं के बारे में अवगत करवाया। श्री मल्होत्रा नेे सभी श्रोताओं के साथ वार्तालाप करके समस्याओं का समाधान किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ बलराज सिंह ने बताया कि शुष्क – अर्द्रशुष्क क्षेत्रों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन के माध्यम से आय एवं रोजगार की भरपूर संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा है कि आजकल मधुमक्खियों की नई प्रजातियां को हम ग्रीन हाउस में ेभी पाल सकत हैं एवं शहद उत्पादन से आय प्राप्त कर सकते है। उन्होंने कहा है कि मधुमक्खियां शहद उत्पादन एवं परागरण में भी सहायक होती हैं। हमें अब मधुमक्खियों को फसल के अच्छे उत्पादन के लिए उनको कीटनाशकों से बचाना चाहिए।
                         इस अवसर पर डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बताया कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कृषि प्रणाली के साथ-साथ मधुमक्खी पालन व्यवसाय सबसे कारगर साबित हो रहा है । इसी को मद्देनजर रखते हुए भारत सरकार ने मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन के तहत 500 करोड रुपए का आवंटन किया है जिसके तहत मधुमक्खी पालन हेतु अनुदान एवं शहद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण व परिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। उन्होंने कहा है कि हमें किसानों का समुह बनाकर एक एग्रीगेट (किसान उत्पादक संगठन) के माध्यम से प्रोसेसिंग, पैकिंग, परिरक्षण, भंडारण एवं विपणन पर भी कार्य करना चाहिए। श्री मधुप व्यास ने बताया कि भारत सरकार का उद्देश्य मधुमक्खी पालन से किसानों की अच्छी आय के साथ-साथ उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता युक्त शहद भी उपलब्ध करवाना है। अभी कोरोना महामारी के समय शहद हमारे रोजाना खान-पान का हिस्सा बन गया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली एनसीआर में किसानों के लिए मधुमक्खी पालन हेतु अच्छी योजना लाने ेका प्रावधान है। श्री रामाकृष्णा ने बताया कि किसान छोटे-छोटे समूह किसान क्लब व स्वयं सहायता समूह आदि बनाकर बैंकों के माध्यम से अनुदान प्राप्त करके मधुमक्खी पालन व्यवसाय से अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं।
                       कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के समापन पर डा. डी. के. राणा, विशेषज्ञ (पादप सुरक्षा), कृ. वि. के., उजवा ने सभी उपस्थित गणमान्य अतिथियों का कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हार्दिक अभिनंदन करते हुए प्रशिक्षणार्थियों को तीन दिवसीय कार्यक्रम की रुपरेखा के बारे संक्षिप्त जानकारी दी।
                       तकनीकी सत्र की शुरूआत करते हुए हुए डा. डी. के. राणा,ने मधुमक्खी के जीवन चक्र, मधुमक्खी पालन में काम आने वाले छत्ते और उपकरणों की गुणवत्ता, परागणकों और मधुमक्खी काॅलोनियों का प्रवाह प्रबंधन, सुपर चैंबर और शहद निस्कार्षण के बारे अवगत करवाया। डा. पी. के. गुप्ता, अध्यक्ष, कृ. वि. के. नई दिल्ली नें प्रशिक्षकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य के संबंध में मधुमक्खी पालन का महत्व के बारे अवगत करवाया। श्री मुकेश शर्मा, प्रसार अधिकारी कृषि विभाग, दिल्ली सरकार ने मधुमक्खी पालन जैव विविधता एवं सतत विकास, मधुमक्खियों का कीटनाशकों से बचाव एवं मधुमक्खी पालको की योजना एवं राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की भूमिका एवं शहद उधोगों में बैंक से वित्तीय सहायता के बारे विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाई। डा. एस. के. ढाका, सहायक प्रोफेसर, सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौधौगिकी विश्वविधालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश ने मधुमक्खी के रोग, माइट, कीट एवं शत्रु और उनके प्रबंधन के बारे जानकारी दी। डा. भरत सिंह, विशेषज्ञ (पादप सुरक्षा), कृ. वि. के., गुरुग्राम, हरियाणा ने मधुमक्खी पालन उधोग की प्रकृति और मधुमक्खी पालन इकाई के लिए स्थल का चयन एवं श्री मनोज पाठक, तकनीकी अधिकारी,  एन. एच. आर. डी. एफ., करनाल ने विभिन्न मौसमों में मधुमक्खी काॅलोनी का वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी से अवगत करवाया। डाॅ. राज नारायण, प्रधान वैज्ञानिक (सब्जी विज्ञान) भा.कृ.अनुप – भारतीय कृषि अनुप्रयोग संस्थान, जोन-2, जोधपुर (राजस्थान) ने मधुमक्खियों के़ द्वारा बागवानी फसलों में परागण प्रबंधन एवं डाॅ रितु सिंह, विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) कृ. वि. के., नई दिल्ली ने शहद उत्पादन, उपयोग, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन एवं निर्यात के बारे अवगत करवाया।
                          इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र की सभी वैज्ञानिकगण श्री राकेश कुमार, डॉ. समर पाल सिंह, श्री कैलाश, श्री बृजेश यादव, श्रीमती मंजू, श्री विशाल एवं राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के श्री सुधीर कुमार एवं श्री रुपेश ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रशिक्षिणार्थीयों ने भाग लिया एवं सोशल मीडिया (यूट्यूब – कृषि विज्ञान केंद्र उजवा और फेसबुक) के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया।

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