नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- अगस्त माह में होने वाले राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनावों के लिए भाजपा ने तैयारियों शुरू कर दी है। इस दौरान भाजपा ने राजनीतिक दलों से समीकरण साधने शुरू कर दिये है। हालांकि बीजेपी के लिए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव जीतना काफी आसान है लेकिन फिर भी वो कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले पड़ाव के लिए बिहार सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश के साथ बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वो किस पाले में चले जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। पिछले चुनावों में नीतीश अपना खेमा बदलकर चौंका चुके हैं।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने करीब दो घंटे बिहार सीएम नीतीश कुमार के साथ बैठक की। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच आगामी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर बातचीत हुई है। बीजेपी की जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के साथ बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों के बीच बढ़ती दूरियों की बातें सामने आ रही है। इसमें ताज्जुब की बात यह है कि दोनों के बीच बैठक की जानकारी बिहार बीजेपी को नहीं दी गई। माना जा रहा है कि बीजेपी लीडरशिप प्रदेश इकाई से नीतीश कुमार के प्रति रुख पर नाराज है।
बिहार पर बीजेपी सूत्रों ने कहा है कि राज्य से सामने आ रही खबरों से केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है। सार्वजनिक बयानों में एनडीए गठबंधन की छवि और सरकार की एकजुटता को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व नहीं चाहता कि राज्य के बीजेपी नेता यह धारणा बनाएं कि वो नीतीश की जगह किसी और चेहरे को लाने के लिए बेताब हैं। साफ है कि नेतृत्व लोकसभा चुनाव तक प्रदेश में बदलाव के मूड में नहीं है।
बिहार भाजपा के एक सूत्र ने कहा, “केंद्रीय मंत्री प्रधान की सीएम के साथ लगभग दो घंटे की बैठक के बारे में राज्य इकाई को भी सूचित नहीं किया गया था। हमें बताया गया है कि यह राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनावों के लिए अपना समर्थन सुनिश्चित करने के लिए मित्रवत मुख्यमंत्रियों से मिलने के भाजपा के प्रयासों का हिस्सा था।”
नीतीश के साथ बीजेपी की बैठक क्यों अहम
नीतीश इससे पहले प्रतिद्वंद्वी दलों द्वारा मैदान में उतारे गए राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का समर्थन कर चुके हैं। 2012 में उन्होंने उस समय एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद राष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था। 2017 में जब वह राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में थे, तो उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार मीरा कुमार के बजाय राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का समर्थन किया था।
सूत्रों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान को नीतीश के साथ आमने-सामने चर्चा के लिए भेजने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के बीच विचार-विमर्श के बाद लिया गया। वहीं, अन्य मुख्यमंत्रियों के बीच बीजेपी बीजद और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी तक पहुंचेगी। दोनों दलों के सूत्रों का कहना है कि वे बीजेपी के साथ वोट करने के इच्छुक हैं। गौरतलब है कि राज्यसभा और लोकसभा में सांसद उप-राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करते हैं, जो अगस्त में होने वाला है और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास दोनों सदनों में स्पष्ट बढ़त है।


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