नई दिल्ली/उमा सक्सेना/- इंडिगो एयरलाइन का परिचालन संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को भी देश के कई हवाई अड्डों पर इंडिगो की उड़ानें रद्द रहीं। शुक्रवार को हालात सबसे अधिक बिगड़े, जब एक ही दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। अचानक हुए इन रद्दीकरणों की वजह से हजारों यात्री घंटों एयरपोर्ट पर फंसे रहे। कहीं लंबी कतारें नजर आईं तो कहीं अव्यवस्था और अफरा-तफरी का माहौल रहा। यात्रियों को न तो समय पर स्पष्ट जानकारी मिली और न ही वैकल्पिक व्यवस्था संतोषजनक रही।
सीईओ का माफी वीडियो, लेकिन गुस्सा शांत नहीं हुआ
बढ़ते दबाव के बीच शुक्रवार शाम इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने एक बयान वीडियो जारी कर यात्रियों से माफी मांगी। उन्होंने मौजूदा हालात को चुनौतीपूर्ण बताते हुए असुविधा के लिए खेद जताया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, लेकिन माफी लोगों का गुस्सा कम करने में नाकाम रही। उल्टा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यूजर्स ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू कर दी।
एक्स पर लगा कम्युनिटी नोट, दावों पर उठे सवालसीईओ के माफी वीडियो पर एक्स पर कम्युनिटी नोट लगाया गया, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्यों की ओर इशारा किया गया। यूजर्स ने दावा किया कि डीजीसीए के नए नियमों के बारे में एयरलाइंस को करीब एक साल पहले ही सूचित कर दिया गया था। इसके बावजूद इंडिगो ने समय पर इन नियमों का पालन नहीं किया। कम्युनिटी नोट में यह भी कहा गया कि इंडिगो ने अपने बयान में नियमों का पालन न करने की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं की, जबकि मौजूदा संकट की बड़ी वजह यही बताई जा रही है।
टिकट बिक्री और मुआवजे पर उठे तीखे सवाल
कम्युनिटी नोट के बाद यूजर्स का गुस्सा और तेज हो गया। कई लोगों ने सवाल किया कि जब हालात इतने खराब हैं और लगातार उड़ानें रद्द हो रही हैं, तो इंडिगो टिकटों की बिक्री क्यों जारी रखे हुए है। यात्रियों ने यह भी पूछा कि जिन लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी, क्या उन्हें केवल रिफंड मिलेगा या इसके अलावा कोई मुआवजा भी दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि एयरलाइन यात्रियों के नुकसान और मानसिक तनाव की जिम्मेदारी ले।
‘योजना विफल’ से लेकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग
यूजर्स की प्रतिक्रियाओं में इंडिगो प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए। कुछ लोगों ने इसे एयरलाइन की ‘योजना स्तर पर बड़ी विफलता’ बताया, जबकि कुछ ने आरोप लगाया कि नियमों में छूट पाने के लिए जानबूझकर दबाव की स्थिति बनाई गई। यह भी कहा गया कि जनवरी 2024 में नए नियम लागू होने के बाद इंडिगो के पास तैयारी के लिए पर्याप्त समय था, फिर भी जरूरी कदम नहीं उठाए गए। कई यूजर्स ने सिर्फ रिफंड को नाकाफी बताते हुए अतिरिक्त मुआवजे की मांग की और यहां तक कि कंपनी के शीर्ष नेतृत्व से इस्तीफे की भी आवाज उठाई।


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