नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/गुजरात/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- अगले साल होने वाले पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा रणनीतिक तैयारी में जुट गई है। अभी तक भाजपा ब्राह्मण व स्वर्ण वोट बैंक पर राजनीति कर रही थी लेकिन अब भाजपा एससी-एसटी व ओबीसी मोर्चे को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए रणनीति बनाने पर गुजरात के केवड़िया में मंथन कर रही है। यह बैठक तीन दिन चलेगी और इसमें दिसंबर 2022 में संभावित गुजरात विधानसभा को लेकर भी चर्चा की जाएगी। हालांकि अभी तक सपा व रालोद ही ओबीसी वोट बैंक पर अपना हक जताती रही है। इस बार भाजपा अपनी रणनीति मे ंबदलाव लाकर ओबीसी को साधने की जुगत लगा रही हैं।
पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में भूमिका और रणनीति पर मंथन करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति गुजरात के केवड़िया में तीन दिन दिवसीय बैठक की शुरुआत गुरुवार को हो गई। इस दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनावों को लेकर रणनीति बनाने के साथ ओबीसी मोर्चा 2022 के अंत में संभावित गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अपने कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श करेगा।
ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण ने गांधीनगर में कहा कि हमारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक नर्मदा जिले के केवड़िया में तीन, चार और पांच दिसंबर को आयोजित होगी। आगामी चुनावों के लिए मोर्चा की भूमिका और रणनीति पर विस्तार से चर्चा करने के साथ इस दौरान एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ओबीसी मोर्चा पिछड़ी जातियों को भाजपा से जोड़ने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आउटरीच कार्यक्रम भी चलाएगा।
तेलंगाना भाजपा के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान अति गरीब और अति पिछड़े वर्ग के लिए मोदी सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने दावा किया, ’सपा (समाजवादी पार्टी), राजद (राष्ट्रीय जनता दल) जैसी पार्टियां और लेफ्ट समझते हैं कि वो पिछड़े वर्गों के ठेकेदार हैं। लेकिन, यह केंद्र की भाजपा सरकार थी जिसने केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए कुल 27 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था को लागू किया।’
लक्ष्मण ने कहा कि ऐसा आजादी के 75 साल बाद देश में पहली बार हुआ। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी को लगता है कि ओबीसी वर्ग के ऐसे लोग जो पहले से ही आर्थिक और सामाजिक रूप से बेहतर हो चुके हैं और ’क्रीमी लेयर’ में शामिल किए जाते हैं, उन्हें आरक्षण के लाभ नहीं दिए जाने चाहिए। हमारी सरकार मानती है कि आरक्षण का फायदा केवल उन लोगों को मिलना चाहिए जो गरीब हैं और पिछड़े हैं। इसका लाभ उन्हें ही मिलना चाहिए जिन्हें असल में इसकी आवश्यकता है।


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