कोरोना से बनने लगे खतरनाक हालात, चुनावी राज्यों में तेजी से फैल रहा कोरोना

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2022
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
293031  
August 14, 2022

हर ख़बर पर हमारी पकड़

कोरोना से बनने लगे खतरनाक हालात, चुनावी राज्यों में तेजी से फैल रहा कोरोना

कोरोना से बनने लगे खतरनाक हालात, चुनावी राज्यों में तेजी से फैल रहा कोरोना -हालात पर चुनाव आयोग की कड़ी नजर, पीएम व चुनाव आयोग कर रहे समय-समय पर समीक्षा


नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कोरोना महामारी के चलते देश में खतरनाक हालात बनने लगे हैं। वहीं चुनावी राज्यों में भी अब कोरोना तेजी से फैलने लगा है। जिसे देखते हुए चुनाव आयोग चुनावी रैलियों को लेकर सख्त हो गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व चुनाव आयोग समय-समय पर स्थिति की समीक्षा कर रहा है ताकि हालात काबू में रहे। लेकिन फिर भी चुनावी राज्यों में कोरोना से हालात तेजी से बिगड़ रहे है। कुछ लोग इन चुनावों को सुपर स्प्रेडर के रूप में देख रहे है तो कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हमे कोरोना के साथ जीना सीखना होगा। आईये जानते है यूपी, पंजाब, मणिपुर, गोवा व उत्तराखंड में आज हालात क्या है।

यूपी में एक हफ्ते में 1700 से 34 हजार हुए एक्टिव केस
यूपी में विधानसभा चुनावों के बीच एक्टिव केस में तेजी से उछाल देखने को मिला है। पिछले एक हफ्ते में एक्टिव केस 20 गुना तक बढ़ चुके हैं। 2 जनवरी को कोरोना के एक्टिव केस 1725 थे, जबकि 10 जनवरी को यह बढ़कर 33,946 हो गए। हालांकि, इन्फेक्शन रेट में कमी थोड़ा सुकून देनी वाली है। राज्य में इन्फेक्शन रेट 4.13 फीसदी ही है। वहीं दूसरी चिंता की बात वैक्सीनेशन की रफ्तार को लेकर है। राज्य में अभी तक सिर्फ 53 फीसदी आबादी को ही दोनों डोज लगी है।

पंजाब में एक्टिव केस 14 गुना बढ़ा
विधानसभा चुनाव के ऐलान के बीच पंजाब में कोरोना के एक्टिव केस में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले सात दिनों में यहां एक्टिव केस में 14 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चु़की है। राज्य में दो जनवरी को 1369 एक्टिव केस थे। वहीं, 10 जनवरी को यह संख्या बढ़कर 19,379 हो गई। इस दौरान ऑक्सीजन सपोर्ट पर जाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। शुरुआत में 33 लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, जबकि अब यह संख्या 254 हो गई है। कोरोना के दस मरीज वेंटिलेटर पर भी हैं। इन्फेक्शन रेट में भी तेजी से इजाफा हुआ है। राज्य में इन्फेक्शन रेट भी अब बढ़कर 23.72 फीसदी हो गई है। कुल जांच में संक्रमित मिले व्यक्तियों की संख्या ही इन्फेक्शन रेट कहते हैं। यह बताता है कि राज्य में कोरोना के केस कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य की स्थित इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यहां दोनों टीका लगवाने वाले लोगों की संख्या देश में सबसे कम है।

गोव में इन्फेक्शन रेट डराने वाला
गोवा में कोरोना इन्फेक्शन रेट चिंताजनक स्तर से काफी ज्यादा है। जिससे यहां संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य में अभी इन्फेक्शन रेट 27.38 फीसदी है। राष्ट्रीय औसत से ज्यादा वैक्सीनेशन से होने से राज्य में अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या अभी भी कम है। पांच चुनावी राज्यों में गोवा कम्पलीट वैक्सीनेशन के मामले में सबसे आगे है। यहां अब तक 96 फीसदी वयस्क आबादी को टीके की दोनों डोज लग चुकी है।

उत्तराखंड : वैक्सीनेशन रेट बेहतर फिर भी एक्टिव केस बढ़े
उत्तराखंड में भी कोरोना के एक्टिव केस में तेजी जारी है। एक हफ्ते में ही यहां एक्टिव केस में 10 गुना की बढ़ोतरी हुई है। 2 जनवरी को एक्टिव केस 506 थे जो 10 जनवरी को बढ़कर 5009 हो गए। यह स्थिति तब है जब राज्य में 85 फीसदी से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी है। जबकि, राज्य में इन्फेक्शन रेट 7.57 फीसदी है।

मणिपुर : मणिपुर में एक हफ्ते में एक्टिव केस दो गुना हुए
मणिपुर में अन्य चार राज्यों के मुकाबले कोरोना के मामले काबू में हैं। कम वैक्सीनेशन के बावजूद यहां इन्फेक्शन रेट सिर्फ 4.14 फीसदी है। वहीं एक्टिव केस की संख्या में भी एक हफ्ते में मात्र दो गुना की बढ़ोतरी देखने को मिली है। दो जनवरी को राज्य में मात्र 215 एक्टिव केस थे जो 10 जनवरी को 438 हो गए हैं।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बीच कोरोना के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने रैली और रोड शो पर 15 जनवरी तक रोक लगा दी है। ऐस में सवाल यह है कि बिना रैली और रोड शो व चुनाव कैसे होगा। ऐसे देश में जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना चुनौती है। इसके साथ ही मास्क और वेंटिलेशन को लेकर भी जागरुकता नहीं है। साथ ही सीक्वेंसिंग और जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यह विधानसभा चुनाव इन राज्यों में कोरोना को सुपर स्प्रेडर इवेंट ही साबित होगा।
हालांकि, कई विशेषज्ञों का कहना है कि हमें महामारी के साथ ही चुनाव में जाना होगा। पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी की माने तो हम दो वर्ष से महामारी के साथ रह रहे हैं। साथ ही भविष्य का भी कुछ पता नहीं है। ऐसे में हम कब तक इन चीजों से दूर भागेंगे। ऐसे में हम चुनावों को टाल नहीं सकते हैं। हमारे सामने इस कोरोना महामारी के दौरान स्कूल खोलने और बंद करने का बड़ा ही खराब अनुभव रहा है। इसलिए हमें महामारी में चुनावों के साथ ही आगे बढ़ना होगा। यह बात अलग है कि हमे कोरोना नियमों का पालन सख्ती से करना होगा।

Subscribe to get news in your inbox