आरजेएस ने हीमोफीलिया व लिवर दिवस पर किया निरोग जीवन कार्यक्रम का आयोजन  

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आरजेएस ने हीमोफीलिया व लिवर दिवस पर किया निरोग जीवन कार्यक्रम का आयोजन  

-आरजेएस अंतर्राष्ट्रीय नृत्य, मातृ पृथ्वी व अक्षय तृतीया दिवस पर भी करेगा कार्यक्रम

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- विश्व हीमोफिलिया और लिवर दिवस के उपलक्ष्य में राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस द्वारा दीदेवार जीवन ज्योति के सहयोग से शरीर, श्वास और विचार के तालमेल से जीवन निरोग कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में दिल्ली मेडिकल काउंसिल के उपाध्यक्ष डॉ. नरेश चावला ने महत्वपूर्ण चिकित्सा सलाह दी, और प्रेरक वक्ता सुरजीत सिंह दीदेवार ने शरीर, श्वास और विचार के तालमेल पर आधारित समग्र स्वास्थ्य सिद्धांतों की व्याख्या की। आरजेएस पीबीएच के संस्थापक उदय कुमार मन्ना द्वारा संचालित इस कार्यक्रम ने समग्र स्वास्थ्य के  महत्व को रेखांकित किया गया। श्री मन्ना ने कहा कि आरजेएस अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस,मातृ पृथ्वी दिवस व अक्षय तृतीया दिवस पर करेगा कार्यक्रम।
डा. चावला ने हीमोफिलिया को एक आनुवांशिक विकार के रूप में समझाया, अक्सर फैक्टर 10 की कमी, जिसमें “व्यक्ति का खून जमता ही नहीं है।“ इसके लिए आजीवन, महंगे फैक्टर 10 इंजेक्शन की आवश्यकता होती है, जो भारत सरकार द्वारा सब्सिडी पर उपलब्ध हैं। उन्होंने विश्व लिवर दिवस पर लोगों को जागरूक करते हुए  डिहाइड्रेशन, फैटी लीवर, स्व-दवा व नीम हकीम तथा शराब आदि से बचने और संतुलित आहार अपने वह हेपेटाइटिस बी टीकाकरण की सलाह दी।
दीदेवार जीवन ज्योति के संस्थापक, प्रेरक वक्ता सुरजीत सिंह दीदेवार ने शरीर, श्वास, और विचार के सामंजस्य के माध्यम से ’निरोग जीवन’ प्राप्त करने के लिए अपना दर्शन प्रस्तूत किया। उन्होंने अपने शरीर के सच्चे संकेतों (भूख, दर्द, थकान) पर ध्यान देने का आग्रह किया, न कि उन्हें अनदेखा करने या दबाने का।
यह वेबिनार, आरजेएस पीबीएच की दीर्घकालिक “अमृतकाल का सकारात्मक भारत उदय“ पहल का हिस्सा है, जो 2047 तक सकारात्मक राष्ट्रीय विकास का दस्तावेजीकरण कर रहा है, जिसका उद्देश्य जनता को जीवन रक्षक जानकारी से सशक्त बनाना था।

श्री दीदेवार ने समझाया कि श्वास आंतरिक स्थिति को दर्शाता है। संतुलित श्वास स्वास्थ्य का प्रतीक है, जबकि तनाव या नकारात्मक भावनाओं के कारण अनियमित श्वास आंतरिक बीमारी में योगदान देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विचारों का स्वास्थ्य पर सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव (60-70 फीसदी) पड़ता है, और संक्रामक नकारात्मकता के प्रति आगाह किया। उन्होंने संतुलित, निष्पक्ष विचारों को सचेत रूप से चुनने और हानिकारक इनपुट को फ़िल्टर करने की वकालत की। दीदेवार ने स्पष्ट किया कि सच्चा ’योग’ शारीरिक व्यायाम (’व्यायाम’), श्वास नियंत्रण (’प्राणायाम’), और मानसिक ध्यान (’ध्यान’) का सामंजस्यपूर्ण मिलन है, न कि केवल अलग-अलग घटक। उन्होंने आत्म-निपुणता और प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने, स्थानीय, मौसमी खाद्य पदार्थों का सेवन करने को प्रोत्साहित किया।


डॉ. नरेश चावला ने हीमोफीलिया की चर्चा करते हुए कहा कि “सुनिश्चित करें कि ऐसे बच्चे, जिन्हें आजीवन इंजेक्शन की आवश्यकता होगी, पैदा न हों… आनुवंशिक परामर्श करवाएं,“ उन्होंने विकार के इतिहास वाले परिवारों से आग्रह किया। लिवर स्वास्थ्य पर, डॉ. चावला ने व्यापक, व्यावहारिक सलाह दी। “लिवर को स्वस्थ  रखने के लिए निम्नलिखित सिफारिश कीः ’हाइड्रेशनः’ पर्याप्त सादा पानी पिएं (गर्मियों में प्रतिदिन लगभग 3.5 लीटर)।
1 ’शराब से बचेंः’
लिवर की सुरक्षा का तरीका पूरी तरह से शराब से बचना है।“
2 ’स्व-दवा और नीम-हकीमों से बचेंः’
पैरासिटामोल जैसी दर्द निवारक दवाओं के आकस्मिक उपयोग और विशेष रूप से भारी धातुओं का उपयोग करने वाले नीम-हकीमों के उपचार के खिलाफ चेतावनी दी, जो घातक लिवर क्षति का कारण बन सकते हैं। “लिवर रोग की रोकथाम, लिवर को पहले बीमार होने देने और फिर उसका इलाज करने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है,“ उन्होंने जोर देकर कहा।
3 ’फैटी लिवर का मुकाबला करेंः’
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डाला, जो शराब न पीने वालों में भी निष्क्रियता और खराब आहार से जुड़ा है। उन्होंने नियमित मध्यम व्यायाम (प्रतिदिन 40-45 मिनट) और स्वस्थ वजन बनाए रखने की सलाह दी।
4 ’संतुलित आहारः’
तले हुए/वसायुक्त खाद्य पदार्थों को कम करने और जंक फूड से बचने, हरी सब्जियां, फल, सब्जियां और स्वच्छ घर का बना भोजन खाने की सलाह दी।
5 ’टीकाकरणः’
हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीकाकरण की सिफारिश की, हेपेटाइटिस ए और सी की व्यापकता का भी उल्लेख किया।
डॉ. चावला ने “लिवर टॉनिक“ की आवश्यकता को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि स्वस्थ जीवन शैली के माध्यम से ठीक से देखभाल करने पर लिवर खुद को पुनर्जीवित करता है। उन्होंने भारत में लिवर प्रत्यारोपण की बढ़ती सफलता पर भी चर्चा की, लेकिन इसकी जटिलता और स्वस्थ दाताओं को खोजने में कठिनाई का उल्लेख किया।
श्री दीदेवार ने शरीर की स्वयं-उपचार की क्षमता के बारे में बात की, जब संतुलित विचार और श्वास के बीच गहरा संरेखण प्राप्त होता है, हालांकि इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए सचेत प्रयास की आवश्यकता है। अन्य प्रश्नों में रोग और भौगोलिक संबंधों तथा लिवर सुरक्षा युक्तियों को संबोधित किया गया। कार्यक्रम में 29 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस  को-ऑर्गेनाइज करने वाली संस्था हिंदी महिला समिति, नागपुर की अध्यक्षा रति चौबे ने  आरजेएस पीबीएच के इस 349 वें वेबिनार में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
कार्यक्रम में सुदीप साहू, स्वीटी पॉल, इसहाक खान, आकांक्षा, मयंक राज, अनिल चौधरी, कृष्णा कुमार, स्वीटी, गुलशन सुमन, हरिकिशन आदि ने जुड़कर समग्र स्वास्थ्य की जानकारी ली।

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